पालीमुकीमपुर क्षेत्र के गांव बहोना कोटरा के प्रधान देवेंद्र सिंह हत्याकांड में आरोपी तीन सगे भाइयों को बृहस्पतिवार को उम्रकैद व जुर्माने की सजा सुनाई गई है। यह फैसला एडीजे प्रथम शाहिद रजा की अदालत से सुनाया गया है। साथ में तीनों को जुर्माने से भी दंडित किया है। खास बात यह है कि इस दौरान उम्रकैद की सजा पाए एक आरोपी की पत्नी व दो रिश्तेदारी को बरी किया गया है।
अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता एडीजीसी अमर सिंह तोमर के अनुसार गांव बहोना कोटरा के प्रधान सेवानिवृत्त फौजी देवेंद्र सिंह अपने पिता साहब सिंह संग 19 जुलाई 2017 की दोपहर गांव हरदाई स्थित आर्याव्रत बैंक शाखा से रुपये निकालने गए थे। जैसे ही देवेंद्र सिंह बैंक से बाहर निकले तो पहले से बाहर घात लगाए बैठे गांव के विपक्षी खेमे के नामजदों ने उन पर हमला करते हुए अवैध हथियारों से ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी।
इस फायरिंग में दो गोली लगने से देवेंद्र जख्मी होकर बैंक के अंदर जाकर गिर पड़े, जबकि आरोपियों की फायरिंग में खुद उनके पक्ष का एक सत्यपाल भी गोली लगने से जख्मी होकर वहीं गिर पड़ा। इस दौरान शोरशराबे पर पब्लिक व बैंक सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों ने तीन आरोपियों को मौके पर पकड़ लिया, जबकि तीन भागने में सफल रहे।
इस दौरान देवेंद्र प्रधान की अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई, जबकि खुद के लोगों की गोली से घायल आरोपी पक्ष के सत्यपाल की भी मौके पर मौत हो गई। इस घटना का मुकदमा देवेंद्र के भाई राजकुमार ने पुष्पपाल, रनवीर सिंह, गुड्डू सिंह, मृत सत्यपाल सिंह, पुष्पपाल की पत्नी विनोद कुमारी निवासी बहोना कोटरा व रिश्तेदार वाहन चालक पूरन सिंह और होतीलाल उर्फ लोकेश निवासी कुंवरपुर के खिलाफ दर्ज कराया।
पुलिस ने अन्य नामजदों की गिरफ्तारी कर मृत सत्यपाल का नाम विवेचना से अलग करते हुए बाकी छह आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की। न्यायालय में सत्र परीक्षण के दौरान मौके से गिरफ्तार मुख्य आरोपी तीन सगे भाई पुष्पपाल, रनवीर व गुड्डू को दोषी करार देकर उम्रकैद व 30-30 हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया है। वहीं संदेह के आधार पर पुष्पपाल की पत्नी विनोद कुमारी, रिश्तेदार पूरन व होतीलाल को बरी किया है। साथ में जुर्माना राशि में से आधी राशी देवेंद्र की पत्नी को देने के आदेश दिए हैं।
प्रधान बन प्लाट के कब्जे ने शुरू की परिवार में रंजिश
गांव में पुराने जानकार लोग बताते हैं कि बहोना कोटरा के शीशपाल व पुष्पपाल एक ही परिवार से हैं। शीशपाल ने वर्ष 2005 में प्रधानी का चुनाव लड़ा। प्रधान बनने के बाद एक प्लाट को लेकर शीशपाल व पुष्पपाल में विवाद शुरू हुआ। दोनों उस प्लाट पर अपना हक बताते थे।
इसी विवाद से जुड़ी खुन्नस में 2010 में पुष्पपाल ने शीशपाल के खिलाफ अपनी पत्नी को प्रधानी का चुनाव जिताया। तब से यह रंजिश और मुखर हो गई। शीशपाल के घर में प्रधानी जाने के बाद 2012 में शीशपाल की खेत पर जाते समय हत्या हुई। उस हत्या का आरोप पुष्पपाल, सत्यपाल, रनवीर, मक्खन सिंह, गुड्डू, विनोद कुमारी व शब्बीर पर लगा। मगर दौरान-ए-सत्र परीक्षण 2020 में साक्ष्यों के अभाव में उस हत्या में सभी आरोपी बरी हो गए।
शीशपाल की हत्या में पैरवी पर मारा गया देवेंद्र को
देवेंद्र सेना से बीआरएस लेकर आने के बाद 2015 के चुनाव में प्रधानी जीत गए थे। साथ में वे अपने चचेरे भाई शीशपाल की हत्या के मुकदमे में पैरोकारी भी कर रहे थे। आरोपी यानी पुष्पपाल पक्ष ने उनसे पैरोकारी से हटने के लिए कहा। मगर देवेंद्र ने इंकार कर दिया। इसी एवज में देवेंद्र को निशाना बनाकर मारा गया। मुकदमे के आरोप के अनुसार घटना वाले दिन सभी लोग जब एकत्रित होकर आए तो बैंक के बाहर एक ही बात कही कि आज इसे मौत के घाट उतार दो।
सत्यपाल की हत्या के मुकदमे में पुलिस ने लगाई एफआर
इस मामले में आरोपी पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता निहाल सिंह ने बताया कि मौके पर सत्यपाल की गोली लगने से मौत हुई थी। देवेंद्र के सिर्फ दो गोलियां पोस्टमार्टम में पाई गईं, जबकि सत्यपाल के 6 गोलियां पाई गईं। इस मामले में हमारी ओर से पुलिस से मुकदमे का अनुरोध किया गया।
मगर पुलिस ने सुनवाई नहीं की। बाद में कोर्ट के आदेश पर मुकदमा दर्ज कराया गया। जिसमें पुलिस ने एफआर लगा दी। इस मुकदमे में देवेंद्र पक्ष की ओर से की गई फायरिंग में सत्यपाल की हत्या का आरोप था। मगर एफआर लगने के कारण मुकदमा खत्म हो गया। उस एफआर के खिलाफ हमने अदालत में रिवीजन कर रखा है, जिसकी सुनवाई अभी अदालत में लंबित है। इधर, अदालत के इस फैसले का हम स्वागत करते हैं। मगर कुछ तथ्यों को लेकर अभी हाईकोर्ट में अपील भी करेंगे।