फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

लेखपाल रिश्वत कांड: छोटी मछली ने तो खाए तीन करोड़... मगरमच्छों का हिसाब भी तो हो

Fri, 09 Feb 2024 05:14 AM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

रिश्वत के मामले में जेल गए लेखपाल के एक वॉयरल ऑडियो टेप ने सनसनी मचा दी है। इसमें लेखपाल एक व्यक्ति से साफ कह रहा है कि वह बहुत परेशान है। ऊपर के लोगों तक चढ़ावा देना पड़ता है। यद्यपि अमर उजाला इस ऑ़डियो की सत्यता की पुष्टि नहीं करता, लेकिन एक बात तो आईने की तरह साफ है कि लेखपाल तो इस भ्रष्टाचार के गंदले तालाब की एक छोटी मछली है। मगरमच्छ तो छुट्टा घूम रहे हैं।
विज्ञापन
रिश्वत डेमो - फोटो : फाइल फोटो
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

अलीगढ़ में धनीपुर एयरपोर्ट के भूमि अधिग्रहण में बैनामा करने वाले किसान से डेढ़ लाख रिश्वत लेने के आरोप में रंगे हाथ पकड़े गए लेखपाल को तो जेल भेज दिया गया। सूत्रों का कहना है कि रजिस्ट्री के नाम पर तीन करोड़ रुपये से ज्यादा का खेल किया गया। इस बीच लेखपाल के एक वॉयरल ऑडियो टेप ने सनसनी मचा दी है। इसमें लेखपाल एक व्यक्ति से साफ कह रहा है कि वह बहुत परेशान है। ऊपर के लोगों तक चढ़ावा देना पड़ता है। यद्यपि अमर उजाला इस ऑ़डियो की सत्यता की पुष्टि नहीं करता लेकिन एक बात तो आईने की तरह साफ है कि लेखपाल तो इस भ्रष्टाचार के गंदले तालाब की एक छोटी मछली है। मगरमच्छ तो छुट्टा घूम रहे हैं। सवाल यह है कि इन्हें पकड़ने का जाल बिछाने की हिम्मत कौन करेगा।

विज्ञापन


अलीगढ़ एयरपोर्ट को लेकर हो रहे भूमि अधिग्रहण में भ्रष्टाचार की बात करें तो अब तक अकेले गांव खानगढ़ी में हुए कुल बैनामों में से पचास के आसपास बैनामों पर शिकायत व आपत्तियां पहुंचीं। ये आपत्तियां एसडीएम, तहसील दिवस से लेकर डीएम व आईजीआरएस तक दी गईं। मगर हर शिकायत की जांच उसी लेखपाल तक गई, जो भ्रष्टाचार में जेल गया। उसने अपने मनमर्जी जांच रिपोर्ट लगाई या फिर कुछ शिकायतों को ही गायब कर दिया गया। बात रफा-दफा कर दी गई। इसकी शुरुआत पांच छह माह पहले हुई। एसडीएम स्तर से मामला बातचीत कर अटकाया गया।  वरिष्ठ स्तर पर किसी के द्वारा शिकायतों पर कार्रवाई नहीं हुई। तब जाकर विजिलेंस में शिकायत का मन बनाया गया और परिणाम सामने आया। यह यक्षप्रश्न अनुत्तरित है कि लेखपाल पर किन-किन अफसरों का वरद हस्त रहा और इस कृपा के बदले उन्हें क्या प्रसाद मिला। जो ऑडियो टेप वायरल हुआ है वह बेहद सनसनीखेज है। इसमें साफ तौर पर अफसरों को भ्रष्टाचार की रकम पहुंचने की बात कही जा रही है। जरा आप भी सुन जान लीजिए इसमें क्या है....

पंडित जी कनशेसन  करा दो

फोन करने वाला शख्स : पंडित जी, मैं कह रहा हूं, साहब पांच को जाने वाले हैं (जांच का विषय है कौन साहब पांच को जाने वाले थे), इसलिए घबरा रहा हूं। ऊपर बात हो गई है, 10-20 हजार मेरी तरफ कम हो जाएंगे।
पंडित जी (समझा जाता है कि यह एक किसान है जिससे लेनदेन की बात लेखपाल कर रहा है): एक में करा दो काम, कल ही पैसे मंगा लेता हूं।
बात करने वाला शख्स (इसे लेखपाल बताया जा रहा है) : पंडित, इतने में न हो पाएगा, ऊपर इतने में बात ही नहीं हुई है, ऊपर तक देने हैं, चलो, ऐसा करो, डेढ़ में करा दो, 10 मुझे बैनामे के बाद दे देना।
पंडित जी : अच्छा पांच तक कराता हूं।
शख्स: पंडित, पांच तक तो साहब चले जाएंगे, आज शाम तक कागज और पैसे दे दो, मुझे बैनामा भी तो कराना है, मैं दुखी हो गया हूं, इस प्रोजेक्ट से, रात 11 बजे तक घर पहुंच रहा हूं, कोई काम नहीं हो पा रहा है, एडीएम भी कह रहीं कि जितना हो रहा है, करो, बाकी का गजट हो जाएगा। गजट होते ही हमारा काम हल्का हो जाएगा। 
पंडित जी: ठीक है मैं कराता हूं।
शख्स: पंडित जी, इतने की तो ब्याज खा जाओगे
पंडित जी : हां, इतनी तो ब्याज आ जाएगी, ठीक है करवाता हूं।

पहले जमीन प्लाटिंग में बेची, अब एयरपोर्ट में किया बैनामा
लेखपाल नारायण प्रताप सिंह के जेल जाने के बाद उसके कारनामे सामने आ रहे हैं। नए किस्से के तौर पर सामने आया है कि गांव के किसान ने प्लाटिंग करके कई साल पहले ही अपनी भूमि बेच दी। मगर जब जमीन एयरपोर्ट में जाने की आई तो लेखपाल से सांठगांठ कर उसी भूमि का एयरपोर्ट को भी बैनामा कर दिया। आपत्ति लगी तो जेल जाने से दो दिन पहले लेखपाल ने डीडी के माध्यम से एसएलएओ आफिस में पैसा वापस कर दिया था। इससे करीब 86 लाख रुपये की सरकारी धनराशि का दुरुपयोग होते-होते बच गया। उजागर हुआ है कि किसान की पूर्व में बेची गई जमीन का लेखपाल ने सांठगांठ कर बैनामा एयरपोर्ट के लिए करा लिया था। करीब पौने तीन बीघा भूमि के लिए संबंधित व्यक्ति के खाते में भी 86 लाख रुपये की राशि भेजी गई। इसकी भनक लगने पर आपत्तियां दर्ज हुईं। इस पर पूरा मामला खुल गया। लेखपाल ने अधिकारियों के डर से किसान के खाते में नियमों के खिलाफ भेजे गई राशि को एसएलएओ आफिस में वापस कर दिया। तीन अलग-अलग डीडी से यह पैसा वापस हुआ। ये सब एक नंबर में हुआ है। अगर इसकी जांच हो तो एक नया मुकदमा लेखपाल व इसमें शामिल लोगों पर हो सकता है।
विज्ञापन

ऐसी पचासों आपत्तियों को दबाए पड़ी है तहसील

ये अकेला केस नहीं है। कम से कम ऐसी पचास आपत्तियां हैं। किसी में कुछ वर्ष पहले गांव की महिलाओं से बैनामा अपने नाम करा लिया और फिर बैनामा एयरपोर्ट को कर दिया। किसी में बैनामा किसी अन्य को प्लाटिंग के रूप में करने के बाद भी एयरपोर्ट को खुद बैनामा कर दिया। कुछ जगहों पर पट्टे की भूमि में नियम विरुद्ध पहले प्लाट काट दिए और अब बैनामा कर दिया। इसमें अनगिनत भूमि के खाते हैं, जिनकी जांच को लेकर शिकायतें एसडीएम से लेकर डीएम तक हुई हैं। एक महिला तो आज भी शिकायत लेकर दर दर भटक रही है कि उससे पहले अपने नाम जबरन बैनामा करा लिया। न उसे रुपया दिया और अब उसकी भूमि का बैनामा खुद दबंगों ने कर दिया।

फिलहाल शुरुआती दौर में तीन लोग इस खेल में शामिल बताए गए हैं
शुरुआती दौर में लेखपाल के अलावा तीन लोग ऐसे हैं, जो इस पूरे खेल में शामिल बताए गए हैं। इन चारों की जांच हो तो लोगों का कहना है कि बहुत से सफेदपोशों के नाम सामने आएंगे। शिकायतकर्ता दबी जबान यह भी कह रहे हैं कि इन सभी के बैंक खातों के अलावा इनकी कोठियों की जांच होना बहुत जरूरी है। रुपये आने से लेकर वापस जाने तक का खेल इनके व इनके परिवार के सदस्यों के बैंक खातों से हुआ है। 

और भी योजनाओं में जांच है जरूरी
ये अकेले धनीपुर एयरपोर्ट ही नहीं, इसके अलावा जिला प्रशासन, शासन व एडीए की तमाम योजनाओं में  भी खेल होने का अंदेशा है, जिनकी हर स्तर पर जांच जरूरी है। इन दिनों एडीए द्वारा खैर रोड पर परियोजनाएं चलाई जा रही हैं। उन्हें भी जांच के दायरे में लाया जाना जरूरी है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें