फोन करने वाला शख्स : पंडित जी, मैं कह रहा हूं, साहब पांच को जाने वाले हैं (जांच का विषय है कौन साहब पांच को जाने वाले थे), इसलिए घबरा रहा हूं। ऊपर बात हो गई है, 10-20 हजार मेरी तरफ कम हो जाएंगे।
पंडित जी (समझा जाता है कि यह एक किसान है जिससे लेनदेन की बात लेखपाल कर रहा है): एक में करा दो काम, कल ही पैसे मंगा लेता हूं।
बात करने वाला शख्स (इसे लेखपाल बताया जा रहा है) : पंडित, इतने में न हो पाएगा, ऊपर इतने में बात ही नहीं हुई है, ऊपर तक देने हैं, चलो, ऐसा करो, डेढ़ में करा दो, 10 मुझे बैनामे के बाद दे देना।
पंडित जी : अच्छा पांच तक कराता हूं।
शख्स: पंडित, पांच तक तो साहब चले जाएंगे, आज शाम तक कागज और पैसे दे दो, मुझे बैनामा भी तो कराना है, मैं दुखी हो गया हूं, इस प्रोजेक्ट से, रात 11 बजे तक घर पहुंच रहा हूं, कोई काम नहीं हो पा रहा है, एडीएम भी कह रहीं कि जितना हो रहा है, करो, बाकी का गजट हो जाएगा। गजट होते ही हमारा काम हल्का हो जाएगा।
पंडित जी: ठीक है मैं कराता हूं।
शख्स: पंडित जी, इतने की तो ब्याज खा जाओगे
पंडित जी : हां, इतनी तो ब्याज आ जाएगी, ठीक है करवाता हूं।
पहले जमीन प्लाटिंग में बेची, अब एयरपोर्ट में किया बैनामा
लेखपाल नारायण प्रताप सिंह के जेल जाने के बाद उसके कारनामे सामने आ रहे हैं। नए किस्से के तौर पर सामने आया है कि गांव के किसान ने प्लाटिंग करके कई साल पहले ही अपनी भूमि बेच दी। मगर जब जमीन एयरपोर्ट में जाने की आई तो लेखपाल से सांठगांठ कर उसी भूमि का एयरपोर्ट को भी बैनामा कर दिया। आपत्ति लगी तो जेल जाने से दो दिन पहले लेखपाल ने डीडी के माध्यम से एसएलएओ आफिस में पैसा वापस कर दिया था। इससे करीब 86 लाख रुपये की सरकारी धनराशि का दुरुपयोग होते-होते बच गया। उजागर हुआ है कि किसान की पूर्व में बेची गई जमीन का लेखपाल ने सांठगांठ कर बैनामा एयरपोर्ट के लिए करा लिया था। करीब पौने तीन बीघा भूमि के लिए संबंधित व्यक्ति के खाते में भी 86 लाख रुपये की राशि भेजी गई। इसकी भनक लगने पर आपत्तियां दर्ज हुईं। इस पर पूरा मामला खुल गया। लेखपाल ने अधिकारियों के डर से किसान के खाते में नियमों के खिलाफ भेजे गई राशि को एसएलएओ आफिस में वापस कर दिया। तीन अलग-अलग डीडी से यह पैसा वापस हुआ। ये सब एक नंबर में हुआ है। अगर इसकी जांच हो तो एक नया मुकदमा लेखपाल व इसमें शामिल लोगों पर हो सकता है।
ये अकेला केस नहीं है। कम से कम ऐसी पचास आपत्तियां हैं। किसी में कुछ वर्ष पहले गांव की महिलाओं से बैनामा अपने नाम करा लिया और फिर बैनामा एयरपोर्ट को कर दिया। किसी में बैनामा किसी अन्य को प्लाटिंग के रूप में करने के बाद भी एयरपोर्ट को खुद बैनामा कर दिया। कुछ जगहों पर पट्टे की भूमि में नियम विरुद्ध पहले प्लाट काट दिए और अब बैनामा कर दिया। इसमें अनगिनत भूमि के खाते हैं, जिनकी जांच को लेकर शिकायतें एसडीएम से लेकर डीएम तक हुई हैं। एक महिला तो आज भी शिकायत लेकर दर दर भटक रही है कि उससे पहले अपने नाम जबरन बैनामा करा लिया। न उसे रुपया दिया और अब उसकी भूमि का बैनामा खुद दबंगों ने कर दिया।
फिलहाल शुरुआती दौर में तीन लोग इस खेल में शामिल बताए गए हैं
शुरुआती दौर में लेखपाल के अलावा तीन लोग ऐसे हैं, जो इस पूरे खेल में शामिल बताए गए हैं। इन चारों की जांच हो तो लोगों का कहना है कि बहुत से सफेदपोशों के नाम सामने आएंगे। शिकायतकर्ता दबी जबान यह भी कह रहे हैं कि इन सभी के बैंक खातों के अलावा इनकी कोठियों की जांच होना बहुत जरूरी है। रुपये आने से लेकर वापस जाने तक का खेल इनके व इनके परिवार के सदस्यों के बैंक खातों से हुआ है।
और भी योजनाओं में जांच है जरूरी
ये अकेले धनीपुर एयरपोर्ट ही नहीं, इसके अलावा जिला प्रशासन, शासन व एडीए की तमाम योजनाओं में भी खेल होने का अंदेशा है, जिनकी हर स्तर पर जांच जरूरी है। इन दिनों एडीए द्वारा खैर रोड पर परियोजनाएं चलाई जा रही हैं। उन्हें भी जांच के दायरे में लाया जाना जरूरी है।