इकराम वारिस, अलीगढ़।
ठंड लगातार बढ़ती जा रही है। लेकिन बेसिक शिक्षा विभाग के परिषदीय विद्यालयों में बच्चे बिना जूते मोजे के आ रहे हैं। दरअसल, 125 रुपये में बच्चों के लिए जूते और मोजे खरीदने में अभिभावकों को ठंड में पसीने छूट रहे हैं। जो खरीदने का मन बना रहे हैं, उन अभिभावकों के बैंक खाते में धनराशि नहीं भेजी गई है।
अभिभावकों का कहना है कि कहा कि 125 रुपये में जूते-मोजे नहीं मिल रहे हैं। ब्रांडेड कंपनी की हवाई चप्पल भी इतनी राशि में नहीं मिल सकती है तो इतने कम रुपये में टिकाऊ और मजबूत जूते-मोजे कैसे मिल पाएंगे।
गौरतलब हो कि शासन से मिलने वाले 1100 रुपये में 600 रुपये की दो ड्रेस, 200 रुपये स्वेटर व स्कूल बैग के लिए 175 रुपये निर्धारित किए गए हैं। 125 रुपये जूते-मोजे के लिए होते हैं।
वहीं, जुड़वां और तीन बच्चों के अभिभावकों के खाते में आधार कार्ड नंबर एक होने से धनराशि नहीं भेजी गई। जिले में 24 सौ से ज्यादा परिषदीय विद्यालय हैं। इनमें दो लाख से ज्यादा विद्यार्थी अध्ययनरत हैं।
दो चार दिन में बनवाएंगे ड्रेस
कुछ अभिभावकों ने जूते-मोजे, स्वेटर, ड्रेस और बैग के लिए मिलने वाली 11 सौ रुपये की धनराशि अपनी जरूरतों पर खर्च कर दी। अब बच्चे ठंड में ठिठुर रहे हैं। अभिभावक मनोज कुमार, बॉबी कुमार ने कहा कि दो-चार दिन में ड्रेस बनाएंगे। शारदा देवी ने कहा कि उन्हें ड्रेस बनवाने के लिए अभी समय नहीं मिला।
मुख्तार खां ने कहा कि पैसे निकाल लिए हैं, समय मिलने पर ड्रेस खरीदेंगे। मुनेश देवी ने कहा कि अभी पैसे ही निकाले हैं। रामचरन ने कहा कि समय न मिलने के कारण रुपये नहीं निकाले गए। मुनीश ने कहा कि खाता ही नहीं चेक किया है। महेश ने कहा कि पुरानी ड्रेस सही स्थिति में है। पुरानी ड्रेस फट जाने पर नई लाएंगे।
मेरे तीन बच्चियां छवि, मानसी व प्रगति प्राथमिक विद्यालय जतनपुर चिकावटी में अलग-अलग कक्षाओं में पढ़ती हैं, लेकिन एक बच्चे के लिए स्वेटर, ड्रेस, जूते-मोजे के लिए धनराशि भेजी गई। बताया गया कि आधार नंबर समान होने पर दोनों की धनराशि नहीं आई होगी।
- भरत लाल, पिता
- कंपोजिट विद्यालय लेखराजपुर में जुड़वा बच्चे अभय व निधि कक्षा पांच में पढ़ रहे हैं, लेकिन स्वेटर, ड्रेस, जूते-मोज की धनराशि नहीं मिल पाई है। बताया गया कि दोनों की जन्मतिथि समान होने के चलते धनराशि नहीं भेजी गई।
-विनोद, पिता
- कंपोजिट विद्यालय जलाली में तीन बच्चे पढ़ते हैं। दोनों बच्चों के स्वेटर, ड्रेस, जूते-मोजे के लिए धनराशि आ गई, लेकिन एक बच्चे की धनराशि नहीं आई है। - आरिफ, पिता
- सरकार की ओर से अभिभावकों के बैंक खाते में ड्रेस, स्वेटर, जूते, मोजे और बैग की धनराशि भेजने से शिक्षकों को तो राहत मिली है, लेकिन बहुत सारे छात्र-छात्राओं की राशि अभी तक खाते में नहीं आई है। इसकी वजह से काफी विद्यार्थी बिना स्वेटर आदि के विद्यालय आ रहे हैं। कुछ अभिभावक धनराशि आने के बावजूद भी ड्रेस, स्वेटर, जूते-मोजे नहीं खरीद पाए हैं।
- मुकेश कुमार सिंह, जिला मंत्री उत्तर प्रदेशीय शिक्षक संघ
शासन से पहली किस्त में डेढ़ लाख रुपये आ चुके हैं। दूसरी किस्त आने वाली है, जो अभिभावक बैंक खाते से निकालकर रुपये खर्च कर लिए हैं, उनको शिक्षक समझाएंगे कि जिस मद के लिए रुपये आए हैं, उसी पर खर्च करें।
- सतेंद्र कुमार, बीएसए