कौशल कुमार ओझा
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की 65 प्रतिशत से अधिक मतदान की योजना पर मतदाताओं ने पानी फेर दिया है। मतदान का प्रतिशत (37.6) बेहद कम होने से अलीगढ़ से लेकर लखनऊ तक खलबली मच गई है। भाजपा नेताओं ने कम मतदान पर मंथन भी प्रारंभ कर दी है।
2017 के विधान सभा चुनाव में इगलास में मतदान का प्रतिशत 64.88 था। उस समय भाजपा के राजवीर दिलेर 74 हजार से अधिक मतों से विजयी हुए थे। राजवीर दिलेर के हाथरस संसदीय क्षेत्र से सांसद निर्वाचित होने तथा विधान सभा की सदस्यता से त्यागपत्र देने के कारण उप चुनाव हो रहा है।
2019 के लोकसभा चुनाव में इगलास विधान सभा क्षेत्र में 62.31 प्रतिशत मतदान हुआ था। भाजपा प्रत्याशी राजवीर दिलेर ने यहां से 80 हजार से अधिक मतों से बढ़त ली थी। इगलास सीट बचाए रखने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करीब एक महीने के अंतराल में दो बार इलगास विधान सभा क्षेत्र में आए। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह एवं प्रदेश संगठन महामंत्री सुनील बंसल यहां आकर 65 प्रतिशत से अधिक मतदान का लक्ष्य निर्धारित कर गए, ताकि भाजपा प्रत्याशी राज कुमार सहयोगी की जीत एक लाख से अधिक मतों से हो सकें। इसके लिए संगठन द्वारा व्यापक स्तर पर योजना बनाई गई थी।
चार मंडलों में विभाजित इगलास विधान सभा में चार विधायकों संजीव राजा, अनिल पाराशर, ठाकुर दलवीर सिंह एवं ठाकुर रवेंद्र पाल सिंह को तैनात किया गया था। इसके अतिरिक्त सांसद सतीश गौतम, हाथरस सांसद राजवीर दिलेर एवं खैर विधायक अनूप प्रधान को भारी अंतर से सीट जीताने के लिए लगाया गया था। प्रभारी मंत्री सुरेश राणा और पुरुषोत्तम खंडेलवाल चुनाव के पूर्व क्षेत्र में डेरा जमाए रहे। ब्रज क्षेत्र एवं जिला के नेताओं को बूथ सौंपे गए थे। पश्चिम यूपी के जाट एवं अलग-अलग जातीय नेताओं को इगलास में उतारा गया। सबकी कोशिश यहीं थी कि अधिक से अधिक मतदान हो। लेकिन चुनाव के दौरान मतदाताओं की उदासीनता ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल कोई कुछ साफ-साफ बोलने को तैयार नहीं है। कम मतदान पर मंथन जरूर शुरू हो गया है।
हमारे कार्यकर्ताओं ने बहुत मेहनत की है। हम विधानसभा चुनाव जीतेंगे। मत प्रतिशत एवं अन्य चीजों को लेकर हम समीक्षा करेंगे। उसके बाद कुछ कह पाएंगे।
- ठाकुर गोपाल सिंह, जिलाध्यक्ष भाजपा