कौशल कुमार ओझा, अलीगढ़।
कोविड महामारी के समय में राजकीय अस्पतालों में संसाधनों का तो विकास हुआ लेकिन दक्ष कर्मचारियों के अभाव में संसाधनों का लाभ जनता को नहीं मिला। अगर बात करें, पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय की तो यहां पर 48 बेड के आईसीयू के लिए सभी संसाधन मौजूद हैं।
लेकिन चिकित्सकों व कर्मचारियों के अभाव में 12 बेड का आईसीयू संचालित होने में परेशानी हो रही है। संविदा या इधर-उधर से जुगाड़ कर रखे कर्मचारियों से काम चलाया जा रहा है। कोविड काल में संसाधनों का इजाफा हुआ लेकिन शासन-प्रशासन द्वारा चिकित्सकों व कर्मचारियों की संख्या को नहीं बढ़ाया गया।
पं. दीनदयाल उपाध्याय चिकित्सालय में वर्तमान में 48 वेंटिलेटर हैं। तीसरी लहर से मुकाबला के लिए पीडियाट्रिक आईसीयू (पीकू) बनकर तैयार है। फिलहाल अस्पताल में मात्र 12 बेड का आईसीयू संचालित हो रहा है। वह भी मुश्किल से। न पर्याप्त डॉक्टर हैं और न ही नर्स और तकनीशियन।
दक्ष लोगों की तो भारी कमी है। गाइड लाइन के अनुसार 12 बेड का आईसीयू संचालित करने के लिए कम से कम 8 डॉक्टर चाहिए। जबकि एक ही स्थायी डॉक्टर है। बाकी संविदा या इधर-उधर से जुगाड़ पर रखे गए हैं। मानक के अनुसार 8 से 10 स्टाफ नर्स चाहिए।
लेकिन मुश्किल से दो-तीन स्टाफ नर्स काम कर रही हैं। ब्लड सैंपलिंग, ईसीजी, एक्सरे, वेंटिलेटर आदि के लिए तकनीशियन चाहिए। इसके अतिरिक्त आईसीयू के लिए सात दिन और 24 घंटे ब्लड जांच की सुविधा चाहिए। अस्पताल में सप्ताह में सिर्फ छह दिन कार्यालय अवधि में ही सेवाएं मिल पाती है। रात में जांच की सुविधा नहीं है। मलखान सिंह जिला चिकित्सालय स्थित ब्लड बैंक से ब्लड मंगाना पड़ता है, क्योंकि अस्पताल में ब्लड बैंक नहीं है।
मास्क और पीपीई किट से कमी से जूझते हुए आईसीयू तक की यात्रा
जनपद में अप्रैल 2020 में कोविड का पहला केस मिला था। उस समय राजकीय अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाओं का घोर अभाव था। स्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मास्क, पीपीई किट और सैनिटाइजर के लिए भी स्वास्थ्यकर्मियों को जूझना पड़ता था। नया वायरस था।
जानकारी का अभाव था। उपचार कैसे हो यह भी किसी को पता नहीं था। कोविड की जांच सिर्फ जेएन मेडिकल कॉलेज की लैब में होती थी। वहां पर अलीगढ़ के अतिरिक्त कई जिलों के सैंपल जांच के लिए आते थे। रिपोर्ट आने में पांच-छह दिन या उससे अधिक समय लग जाते थे।
संक्रमण तेजी से बढ़ रहा था। कोविड रोधी टीका भी नहीं आया था। एंटीजन टेस्ट किट भी नहीं था। उपचार के लिए ठोस गाइड लाइन तक नहीं थी। जनपद के किसी भी राजकीय अस्पताल में वेंटिलेटर और आईसीयू तक नहीं था।
अंततऱ् संक्त्रस्मण रोकने के लिए लॉकडाउन की नौबत आ गई। आर्थिक नुकसान तो हुआ लेकिन जिंदगी बच गई। इसके साथ ही कोरोना से लड़ाई की तैयारी का अवसर मिल गया।
दूसरी लहर में सबसे अधिक जान को नुकसान
शुरूआती दौर में ही पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय को कोविड समर्पित अस्पताल (लेवल 2) घोषित कर दिया गया। जेएन मेडिकल कॉलेज भी कोविड का लेवल टू अस्पताल बन गया। वेंटिलेटर आ गए। आईसीयू बनकर तैयार हो गया था। उसमें कुछ स्थायी और ज्यादा संविदाकर्मी तैनात किए गए। इस बीच कोविड जांच के लिए एंटीजन किट आ गया।
पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय में कोविड जांच के लिए आरटीपीसीआर लैब बन गया। इससे जांच में और अधिक तेजी आई। रिपोर्ट कम समय में आने लगे। दूसरी लहर में कुछ अप्रिय घटनाओं को छोड़ दे तो स्वास्थ्य कर्मियों ने जान जोखिम में डालकर मरीजों की सेवा की। इसकी वजह से बड़ी संख्या में मरीजों की जान भी बची। लेकिन कुछ अप्रिय घटनाएं भी दर्ज हुई।
सरकारी रिकार्ड में पिछले बीस महीने में कोविड से भले ही 108 लोगों की मौत दर्ज हो लेकिन हकीकत कुछ और है। दूसरी लहर के दौरान मरीजों को भर्ती करने के लिए अस्पताल में जगह नहीं थे। आईसीयू में भाग्यशाली लोग ही पहुंच पाते थे। जिंदगी बचाने के लिए ऑक्सीजन तक की दिक्कत हुई। कुछ दवा एवं इंजेक्शन बाजार से गायब होने पर भी मरीज मुसीबत से गुजरे।
टीकाकरण के बाद लौटा आत्मविश्वास
जनवरी 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे देश में कोविड रोधी टीकाकरण का शुभारंभ किया। शुरू में फ्रंट लाइनर यानी स्वास्थ्यकर्मियों को टीका लगाया गया। बाद में वरिष्ठ नागरिक एवं बीमार लोगों को टीका लगाया गया।
फिर 18 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को टीका लगना शुरू हुआ। 11 महीने में जनपद में 21.54 लाख लोगों को प्रथम एवं 10.39 लाख लोगों को दूसरी डोज लग चुकी है। जनपद में प्रथम डोज से करीब साढ़े पांच लाख लोग दूर हैं। महामारी के काल में जनपद में 17.82 लाख लोगों की कोविड जांच हुई है।
48 बेड के आईसीयू के लिए सभी संसाधन मौजूद हैं। वेंटिलेटर एवं ऑक्सीजन पर्याप्त मात्रा में है। 1000 लीटर प्रति मिनट के प्लांट की तकनीकी गड़बड़ी दूर हो गई है और अब वह चालू हो गया है। मैन पॉवर की सबसे अधिक दिक्कत है। पूरी स्थिति से अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।
- डॉ. अनुपम भास्कर, सीएमएस, पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय