सोमवार को आईटीआई परिसर में दस पदों पर नौकरी करने के लिए पहुंचे करीब 700 बेरोजगारों की भीड़ को देखकर आईटीआई स्टाफ के हाथ पैर फूल गए थे। लेकिन यहां सवाल उठता है कि आखिर किसकी गलती से यह संख्या इतनी बढ़ गई। यह जांच योग्य विषय है।
जानकारी के अनुसार नोएडा स्थित एक मोटर कार कंपनी के एचआर ने ईमेल भेजकर और फोन कर दस पदों पर अभ्यर्थी मांगे। कैंपस प्लेसमेंट के चलते शिक्षकों से कुशल विद्यार्थियों को बुलाने के लिए कहा गया था। लेकिन इस प्लेसमेंट की सूचना गूगल, यूट्यूब और कई वेबसाइट पर विगत कई दिनों से साझा की जा रही है। इतना ही नहीं, कुछ अखबारों में भी जानकारी छापी गई थी। यही वजह रही कि 10 पदों पर 700 से अधिक युवा साक्षात्कार देने के लिए पहुंचे। इस संबंध में आईटीआई प्राचार्य नवाब सिंह ने बताया कि शिक्षकों से उनके कुशल विद्यार्थियों को बुलाने को कहा था। अगर 100 विद्यार्थी भी होते तो उनमें से 10 का चयन हो जाता। इतनी संख्या के लिए मास्क और सैनिटाइजर की व्यवस्था की गई। आईटीआई स्टाफ और कार्यालय की तरफ से किसी भी प्रकार की कोई जानकारी साझा नहीं की गई। ऐसे में किसने यह बेरोजगार का मेला लगाया, वह बता नहीं पाए। नतीजतन पुलिस को बुलाना पड़ा।
जिले में तकरीबन 70 हजार हैं बेरोजगार
रोजगार के लिए बेरोजगारों के मेले पर अमर उजाला ने पड़ताल की तो पता चला कि जिले में 70 हजार के लगभग बेरोजगार पंजीकृत हैं। जबकि बिना पंजीकरण वालों की संख्या भी 30 हजार से कम नहीं है। क्षेत्रीय सेवायोजन अधिकारी एके सिंह ने बताया कि लॉकडाउन के चलते तकरीबन 8600 प्रवासी मजदूर और नौकरीपेशा लोगों ने अपना पंजीकरण कराया है। वहीं नगर पंचायत, नगर निगम और नगर पालिकाओं से प्राप्त तकरीबन 63 हजार बेरोजगारों का सत्यापन किया जा रहा है। यह वह बेरोजगार हैं, जो नौकरी के लिए घूम रहे हैं। जिले में एक लाख बेरोजगार, जिनमें से 81 हजार पंजीकृत हैं। लॉकडाउन में बाहर से आए 8600 प्रवासी बेरोजगार हैं।