ऐतिहासिक नुमाइश समापन समारोह के बाद अलविदा कहते हुए अगले साल आने का वादा करते हुए विदा हो गई। इस बार नुमाइश ने संस्कृति के रंगों की जो खुशबू बिखेरी है, वो हर दिल को मुग्ध कर गई। नुमाइश में उमड़ी दर्शकों की भीड़ ने साबित कर दिया कि अलीगढ़ के लोग कला और संस्कृति के प्रेमी हैं।
करीब डेढ़ दशक से नुमाइश यहां की पहचान है, जो पूरे देश में अलीगढ़ की संस्कृति की चमक बिखेरने का काम करती है। इस बार नुमाइश में प्रशासनिक व्यवस्थाओं ने भी सभी का दिल जीत लिया। हर किसी ने जमकर तारीफ की। पर, विदा होती नुमाइश को लेकर तमाम लोगों के दिलों में कसक थी। फिर, एक साल इंतजार करना होगा। इस बार नुमाइश से शहर दौड़ पड़ा। नुमाइश के मंचों पर शहर की प्रतिभाएं निखरीं और बच्चों की कल्पनाएं खिल उठीं।
नुमाइश में इस बार पूरे महीने काफी रंगत देखने को मिली। दर्शकों के भारी संख्या में उमड़ने से खूब बिक्री हुई । - मुस्तफा गाजी
इस बार नुमाइश में दर्शक खूब आए। इससे दुकानदारी भी खूब हुई। हर साल की अपेक्षा इस बार नुमाइश की व्यवस्थाएं बेहतर थी। इससे अगले साल की नुमाइश में आने के लिए उत्साह बढ़ा है। - अनिल चौहान
पिछले कई साल से नुमाइश देखने आ रहे है। इस बार कुछ व्यवस्थाएं अलग थीं। इस बार नुमाइश कुछ अलग हटकर नजर आई। अच्छा लगा और खूब मनोरंजन हुआ। अब अगले साल का इंतजार रहेगा। - सीमा
नुमाइश में झूले, खेल, तमाशों के साथ कला बीथिका, कला प्रदर्शनी, नीरज-शहरयार पार्क ने खूब लुभाया। - अहमद सिद्दीकी