नितिन माहौर हत्याकांड मामले के सभी आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर भूख हड़ताल कर रही महिलाओं के तेवर सोमवार को अचानक उग्र हो गए। बड़ी संख्या में महिलाएं हाथों में तख्ती लेकर नारेबाजी करती हुई सीधे डीएम कार्यालय में घुस गईं और वहां जमकर हंगामा किया। कार्यालय में डीएम के न मिलने पर मृतक नितिन की मां शांतिदेवी ने उनकी कुर्सी ही कब्जा ली।
समझाने पहुंचे सिटी मजिस्ट्रेट का एक महिला ने कोट खींच डाला। इससे हड़कंप मच गया।
एडीएम सिटी, एसपी सिटी, सीओ समेत अन्य अफसर मौके पर पहुंच गए। मामले में प्रशासन की ओर से पूर्व सांसद बिजेंद्र सिंह, पूर्व विधायक जमीरउल्लाह, शांति देवी समेत 500 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है।उल्लेखनीय है कि विगत वर्ष 15 नवंबर को निकाय चुनाव के दौरान सिपाही की सरकारी कार्बाइन से चली गोली से एक किशोर नितिन जख्मी हो गया था। चार पांच दिन बाद उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई थी।
इस मामले में सिपाही मनीष समेत दो अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। सिपाही को तो जेल भेज दिया गया, लेकिन अन्य दो आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को अड़ीं महिलाएं एक पखवाड़े से कलेक्ट्रेट गेट के बाहर धरना प्रदर्शन कर रही हैं। सोमवार को लगभग डेढ़ बजे सर्व दलीय कोरी समाज संघर्ष समिति के बैनर तले प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने कलेक्ट्रेट में घुसने की कोशिश की तो महिला पुलिस ने किसी तरह बाहर निकाला। उन्होंने दोबारा गेट संख्या दो से कलेक्ट्रेट में घुसने की कोशिश की तो महिला पुलिस के साथ अन्य पुलिसकर्मियों ने उनका रास्ता रोक लिया। इस दौरान गुस्साई महिलाओं ने महिला पुलिस से जमकर धक्का मुक्की और हाथापाई की।
महिलाओं के आगे असहाय नजर आया प्रशासन कुछ महिलाओं ने जूते-चप्पल भी लहराए। इस दौरान कुछ महिलाएं जिलाधिकारी के दफ्तर में घुसने में कामयाब हो गईं और मृतक नितिन की मां शांति देवी डीएम की कुर्सी पर बैठ गईं। सीओ तृतीय संजीव दीक्षित से भी अभद्रता की। कलेक्ट्रेट गेट पर चल रही सर्वदलीय कोरी समाज संघर्ष समिति की भूख हड़ताल में शामिल पुरुष भी आ गए। इससे उपद्रव की स्थिति बन गई। कुछ ही देर में पुलिस की दंगा नियंत्रण इकाई भी मौके पर पहुंच गई।
आंदोलनकारियों को काबू में करने की कोशिश में बल प्रयोग की नौबत आ गई। स्थिति को भांप कर समिति के अध्यक्ष जगदीश माहौर, प्रदेश अध्यक्ष घनश्याम कोरी एवं अन्य नेता पहुंच गए और उग्र लोगों को समझा-बुझाकर शांत कराया। इसके बाद आंदोलनकारी धरनास्थल पर सड़क पर ही बैठ गए। इससे अनूपशहर रोड जाम हो गई। करीब तीन घंटे तक यही स्थिति बनी रही। सायं पांच बजे के करीब मजिस्ट्रेट को राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपने के बाद आंदोलनकारी सड़क से हटे।
प्रदर्शनकारी बिना जांच कुछ लोगों को गिरफ्तार करने की मांग कर रहे थे, जो कि कानूनन संभव नहीं है। यदि उन्हें स्थानीय पुलिस की जांच पर संदेह है तो हम किसी अन्य जनपद अथवा एजेंसी से जांच कराने के लिए तैयार हैं। जिलाधिकारी की कुर्सी कब्जाने एवं उनके कार्यालय में जबरन घुसकर हंगामा करना कानून का उल्लंघन है। इस मामले में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। -एसबी सिंह, एडीएम सिटी