आशीष श्रीवास्तव
अलीगढ़। कभी गन्ना उत्पादन की दृष्टि से समृद्ध अलीगढ़ जिले में गन्ने का रकबा निरंतर सिमट रहा है। वजह बनी है साथा चीनी मिल की नाकामी। चालीस साल पुरानी इस मिल में लगातार चार साल से गन्ने की पेराई ठीक से नहीं हो रही है। मिल में गन्ना नहीं खपने के कारण किसानों का इस खेती से मोह भंग हो गया है। इसका असर गन्ने के रकबे एवं उत्पादन पर साफ नजर आ रहा है। हर साल गन्ने के रकबे में करीब एक हजार हेक्टेयर की कमी आ रही है। वहीं उत्पादन 24 लाख क्विंटल से घटकर करीब 4.50 लाख क्विंटल पर आ गया है। यही हाल रहा तो उत्पादन में और भी कमी आने के आसार हैं।
1980 की मिल 2020 में फेल
अलीगढ़। साथा चीनी मिल के महाप्रबंधक रमाशंकर ने बताया कि गन्ने की दृष्टि से समृद्ध जिलों में से एक अलीगढ़ जिले में साथा चीनी मिल की स्थापना सन् 1980 में हुई थी। इसकी क्षमता 12500 क्विंटल गन्ना पेराई की है। उस समय जिले में करीब 24 लाख क्विंटल गन्ने का उत्पादन होता था। वर्तमान में यह घटकर करीब साढ़े चार से पांच लाख क्विंटल तक रह गया है।
चार साल से मिल मांग रही पानी
अलीगढ़। करीब चालीस वर्ष की हो चुकी साथा चीनी मिल की मशीनों में यूं तो वर्षों से कोई न कमी किसानों की आंख की किरकिरी बनती रही है, लेकिन पिछले चार वर्षों में यह गड़बड़ी नासूर बन गई है। कभी मिल का बायलर गड़बड़ा जाता है तो कभी हैडर या फिर चेन टूट जाती है। पिछले साल तो हद ही हो गई थी। करीब पांच माह चलने वाली यह मिल मात्र 45 दिन ही चल सकी थी।
पिछले पांच सालों में मिल में पेराई
-वर्ष 2015-16-6 लाख क्विंटल
-वर्ष 2016-17-5.86 लाख क्विंटल
-वर्ष 2017-18-13.95 लाख क्विंटल
-वर्ष 2018-19-7.48 लाख क्विंटल
-वर्ष 2019-20-6.15 लाख क्विंटल
हर साल घट रहा रकबा
-वर्ष 2018-19-6800 हेक्टेयर
-वर्ष 2019-20-5900 हेक्टेयर
-वर्ष 2020-21-4800 हेक्टेयर
क्या कहते हैं किसान
-साथा चीनी मिल का बुरा हाल राजनेताओं के कारण हुआ है। यदि ये लोग कोशिश करते तो अब तक नई मिल लग जाती, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। मिल के मेंटेनेंस के नाम पर करोड़ों रुपये हर साल आते हैं। कहां लगते हैं पता नहीं। अगर यह पैसा मिल के मेंटेनेंस में लगता तो किसानों को दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ता।
- डॉ. शैलेंद्र पाल सिंह, भाकियू भानु उपाध्यक्ष व किसान
- साथा चीनी मिल न चलने के कारण किसानों का गन्ने की खेती से मोह भंग हो चुका है। पिछले साल मिल न चलने के कारण इगलास एवं गोंडा के किसानों ने गन्ने की खेती से तौबा कर ली थी। यही कारण है कि कभी 24 लाख क्विंटल गन्ने का उत्पादन करने वाले अलीगढ़ में वर्तमान में उत्पादन करीब साढ़े चार-पांच लाख क्विंटल तक रह गया है।
- एसके सिंह राणा, पूर्व उपाध्यक्ष गोपी लधऊआ चीनी मिल
- चार साल से साथा चीनी मिल न चलने के कारण गन्ना किसानों को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। पिछले साल किसानों का 60 प्रतिशत गन्ना दूसरे जिलों की मिलों में पेराई के लिए गया था। उनका आज तक पेमेंट तक नहीं मिला। ऐसी परिस्थिति में किसानों ने गन्ने के बजाय अन्य फसलों की ओर रुख किया है। गन्ना विभाग एवं कृषि वैज्ञानिकों की ओर से भी कोई समर्थन नहीं मिलने से किसान हताश हो गया है।
- हरेंद्र सिंह, पूर्व उपाध्यक्ष साथा चीनी मिल
डीएम ने कहा कि अगले साल तक होगा अपग्रेडेशन
अलीगढ़। डीएम चंद्रभूषण सिंह ने बताया कि साथा चीनी मिल का उच्चीकरण का काम अगले साल होगा। प्रदेश सरकार के बजट में इसके लिए बजट आवंटित होगा। बजट मिलने के बाद मिल का उच्चीकरण कराया जाएगा।
सोमवार से शुरू होगी पेराई
अलीगढ़। साथा मिल के महाप्रबंधक रमाशंकर ने बताया कि तीन दिन पूर्व डीएम चंद्रभूषण सिंह ने मिल के पेराई सत्र का उद्घाटन किया है। सोमवार से पेराई शुरू हो जाएगी। किसानों की पर्ची काटने का काम चल रहा है। उन्होंने बताया कि मिल के सुचारू संचालन के लिए बायलर व हैडर का मेंटेनेंस कराया गया है। इसका ट्रायल चल रहा है।
साथा चीनी मिल के ठीक ढंग से न चलने से हर साल गन्ना उत्पादन का रकबा करीब एक हजार हेक्टेयर घट रहा है। अगले साल मिल के उच्चीकरण के बाद स्थिति सुधरने के आसार हैं।
- डॉ.सुभाष यादव, जिला गन्ना अधिकारी