अलीगढ़ के सरकारी अस्पताल मलखान सिंह में आग से झुलसे मरीजों को निराशा ही मिलती है। यहां बर्न वार्ड है, जिस पर ताला लगा रहता है। आग से झुलसे मरीजों को लौटा दिया जाता है या जेएन मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया जाता है।
अलीगढ़ के मलखान सिंह जिला अस्पताल के बर्न वार्ड पर ताला लटका है। आग से झुलसे मरीज यहां से लौटाए जा रहे हैं। अस्पताल में गंभीर मरीजों के इलाज की सुविधा न होने के चलते उन्हें जेएन मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया जाता है।
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अस्पताल प्रशासन का कहना है कि बर्न वार्ड में कोई फालतू व्यक्ति न बैठे, इसलिए इस पर ताला लगा दिया गया होगा। उधर, जेएन मेडिकल कॉलेज के प्लास्टिक सर्जरी विभाग में रोजाना चार-पांच आग से झुलसे मरीज पहुंच रहे हैं।
तीन दिन पहले रिश्तेदार लेकर अस्पताल पहुंचे थे। वह आग से झुलस गए थे। अस्पताल में कर्मचारियों ने बताया कि झुुलसे मरीजों का उपचार नहीं होता है, क्योंकि बर्न वार्ड बंद है। इसके डॉक्टर नहीं हैं। मरीज को निजी अस्पताल भर्ती करना पड़ा। उनके इलाज में अच्छी खासी रकम भी खर्च हो गई।-मोंटी
केमिकल के छींटे पड़ने से पड़ोसी का दाहिना हाथ झुलस गया था। उन्हें लेकर अस्पताल आए थे। पहले इमरजेंसी पहुंचे, तो बताया कि झुलसे मरीज का उपचार नहीं होता है। यहां आने वाले मरीज को रेफर कर दिया जाता है। पड़ोसी को निजी अस्पताल ले गए। मरीज को आर्थिक बोझ ज्यादा झेलनी पड़ी।-विवेक यादव
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झुलसे मरीजों का इलाज होता है, लेकिन ज्यादा गंभीर मरीजाें को रेफर कर दिया जाता है। फिलहाल, इस समय कोई आग से झुलसा मरीज भर्ती नहीं है। बर्न वार्ड में ताला इसलिए लगा दिया जाता है, कोई फालतू व्यक्ति न बैठे।-डॉ. जगवीर सिंह, सीएमएस, जिला अस्पताल