राजा महेंद्र प्रताप विश्व विद्यालय (आरएमपी) के कुलपति डा. चंद्रशेखर ने 6 जनवरी 2022 के बाद आगरा से जारी अलीगढ़ के आरएमपी विवि से संबद्ध कालेजों को दी गईं विषय, अतिरिक्त कक्ष की मान्यता तथा विस्तारीकरण को अमान्य घोषित कर शासन को रिपोर्ट भेज दी है।
उनका कहना है कि 6 जनवरी 2022 से यह विवि अस्तित्व में आ चुका है, इसके बावजूद आगरा के डा. भीमराव आंबेडकर विश्व विद्यालय को अलीगढ़ से संबद्ध डिग्री कालेजों को किसी भी तरह की मान्यता जारी करने का अधिकार नहीं था। इसके बावजूद मान्यताएं जारी कर दी गई।
जिसकी वजह से अलीगढ़, एटा, हाथरस और कासगंज के 50 डिग्री कालेजों को आगरा से मिलीं इन मान्यताओं पर संकट खड़ा हो गया है। इसके अलावा बीएड तथा अन्य कोर्स के लिए किए गए विस्तारीकरण पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
आरएमपी विवि के कुलपति डा. चंद्र शेखर ने छह जनवरी 2022 को कार्यभार ग्राहण किया था। उसी समय से यह विवि अस्तित्व में आ गया था। कुलपति डा. चंद्रशेखर के अनुसार सभी कार्य अलीगढ़ के आरएमपी विवि से होने चाहिए थे लेकिन पिछले सप्ताह तक आगरा से होते रहे हैं।
इस मामले में कुलपति की ओर से प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा, राज्यपाल और मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अवगत करा दिया था। इसके बाद शासन ने आगरा के डा. भीमराव आंबेडकर विवि के कुलपति को अलीगढ़ के आरएमपी विवि से संबधित कालेजों की सभी पत्रावली सौंपने के आदेश दिए थे।
इस बारे में लखनऊ में मुख्यमंत्री और उच्च शिक्षा सचिव के साथ दोनों विवि के कुलपति और कुल सचिव की बैठक भी हुई थी। जिसमें आगरा विवि के रजिस्ट्रार को अलीगढ़ के आरएमपी विवि से संबंधित पत्रावली एक सप्ताह में सौंपने के आदेश किए थे। इसी बैठक के 15 दिन बाद पिछले रविवार को डिग्री कालेजों की पत्रावलियां भेजी गईं।
कालेज संचालकों में खलबली
आरएमपी विश्वविद्यालय के इस निर्णय के बाद से डिग्री कालेजों के प्राचार्य और संचालकों में खलबली मची हुई हैं। इन सभी का कहना है कि हम लोगों की इस प्रकरण में कोई गलती नहीं है। सभी कालेजों की पत्रावलियां आगरा में होने के कारण वहीं से विषय, अतिरिक्त कक्ष की मान्यता और विस्तारीकरण के लिए आवेदन किए गए थे। उसी के आधार पर मान्यताएं मिलीं हैं।