महानगर के जीटी रोड के बुलट शोरूम संचालक से स्पीड पोस्ट के जरिये चिट्ठी भेजकर चार लाख रुपये की रंगदारी मांगी गई। इतना ही नहीं, बात न मानने पर परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकी तक दी गई। शिकायत जब क्वार्सी पुलिस तक पहुंची तो इंस्पेक्टर क्वार्सी ने जांच कर डाकघर के सीसीटीवी की मदद से उनकी हाउसिंग सोसाइटी के ही एक बुजुर्ग चौकीदार को दबोच लिया। बाद में चूंकि पूरा प्रकरण सिविल लाइंस थाने का था। इसलिए चौकीदार को सिविल लाइंस पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर बृहस्पतिवार को जेल भेज दिया।
हुआ यूं कि जीटी रोड स्थित बाइक शोरूम संचालक निशांत मंडोला सिटी इन्क्लेव सिविल लाइंस में रहते हैं। 10 दिसंबर को उनके घर स्पीड पोस्ट से एक चिट्ठी पहुंची जो उनके परिवार की महिला ने रिसीव की। इस चिट्ठी में चार लाख रुपये की रंगदारी मांगी गई थी। यह कहा गया था कि जहां आपकी गाड़ी खड़ी होती है, उसके पीछे बिजली के पोल के सहारे लाल रंग के थैले में रुपये रख देना। बात न मानने पर परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी गई। इस चिट्ठी पर परिवार हैरान रह गया और पूरा वाकया इंस्पेक्टर क्वार्सी छोटेलाल को बताया गया। वे अभी मामले की जांच में जुटे ही थे कि 15 दिसंबर को फिर दूसरी चिट्ठी इसी तरह घर पहुंची और वही बात उसमें फिर से लिखी थी।
साथ में यह धमकी थी कि अगर इस बार 23 दिसंबर तक बात नहीं मानी गई तो परिणाम गंभीर होंगे।
दोनों चिट्ठी जब इंस्पेक्टर क्वार्सी ने देखीं तो वे रेलवे स्टेशन के डाकघर से भेजी गई थीं। वहां व उस रास्ते के सीसीटीवी देखे गए तो सिटी इंक्लेव में ही एक हार्डवेयर कारोबारी के 62 वर्षीय चौकीदार का चेहरा चिट्ठी पोस्ट करते समय कैद हुआ। जब चौकीदार को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया तो वह टूट गया। चौकीदार चंद्रपाल निवासी नारई सिकंदराराऊ ने स्वीकारा कि उस पर बेटी की शादी का डेढ़ लाख रुपया कर्ज हो गया था। उसी कर्ज को उतारने के फेर में उसने यह हरकत की है। सीओ तृतीय अनिल समानिया के अनुसार पूरा प्रकरण सिविल लाइंस थाने से जुड़ा था। इसलिए सिविल लाइंस में प्रकरण में मुकदमा दर्ज कर आरोपी चंद्रपाल को जेल भेजा गया है।