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अफसर कर रहे गोल-मोल...गड्ढे खुदवाकर क्यों नहीं खोल रहे पोल

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पत्रकारो से वार्ता करते नगर पालिका परिषद खैर के चेयरमैन संजीव अग्रवाल, ब्रज मोहन गर्ग, राधे श्या? - फोटो : CITY OFFICE
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खैर नगर पालिका परिषद द्वारा संचालित कान्हा गोशाला में गोवंश की मौत को लेकर प्रशासनिक जांच में चेयरमैन व ईओ के बीच मतभेद और उनकी लापरवाही बताए जाने पर चेयरमैन संजीव अग्रवाल ने पलटवार किया है। उन्होंने इसे अधिकारियों द्वारा अपनी लापरवाही छिपाने के लिए साजिश बताया है। उन्होंने सीधे-सीधे कहा कि अधिकारी 100 से अधिक गोवंश की मौत के मामले में गड्ढे खुदवाकर सच्चाई की जांच क्यों नहीं करा रहे। चेयरमैन ने एलान किया है कि वह इसकी प्रदेश स्तरीय जांच कराने की मांग करेंगे और लखनऊ जाकर मुख्यमंत्री से मिलेंगे। चाहे जो भी दोषी हो, उस पर कार्रवाई की आवाज उठाएंगे।
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नगर पालिका परिषद खैर चेयरमैन संजीव अग्रवाल ने शुक्रवार को यह बातें यहां समद रोड के एक होटल में प्रेसवार्ता के दौरान कहीं। उन्होंने बताया कि गोशाला संचालन के लिए पूरा स्टाफ है। समय-समय पर वह भी देखने जाते हैं। बुधवार को सूचना पर वह पहुंचे तो ईओ से फोन पर कहा। वहीं सीधे डीएम के स्टेनो व एसडीएम को सूचना दी। वहां सवाल-जवाब में जेसीबी ड्राइवर ने अब तक 100 से अधिक गायों की इसी तरह मौत होने और उन्हें गोशाला के पीछे जमीन में दफनाने की बात स्वीकारी।
इस पर जब उन्होंने जांच की आवाज उठाई तो उनकी इस आवाज को दबाने के लिए उन्हें व ईओ को जिम्मेदार बता दिया है, जबकि उनका ईओ से किसी तरह का कोई विवाद नहीं है। इस मामले की जांच जरूरी है। अधिकारी जांच से क्यों बच रहे हैं। गड्ढों को क्यों नहीं खुदवाया जा रहा। वह इसे लेकर मुख्यमंत्री से मिलेंगे। इस दौरान उनके साथ मौजूद भाजपा मंडल उपाध्यक्ष कालीचरन शर्मा व व्यापारी नेता बृजमोहन गर्ग ने कहा कि प्रशासन चेयरमैन के सिर ठीकरा फोड़ रहे हैं, जबकि प्रशासन ने आज तक वहां का हाल नहीं लिया।
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तीस रुपये में कैसे आएगा पंद्रह किलो चारा?
अधिकारियों की जांच रिपोर्ट पर सवाल खड़े करते हुए उन्होंने कहा कि एक गोवंश को पांच किलो सूखा व दस किलो हरा चारा प्रतिदिन खिलाया जाना आवश्यक है। प्रति किलो भूसा दस रुपये, वहीं हरा चारा प्रति किलो चार रुपये के हिसाब से पंद्रह किलो चारे के दाम लगभग नब्बे रुपये होते हैं। ऐसे में भरपेट भोजन कहां से दें। ऑडिट टीम अलग से निर्धारित मूल्य से अधिक खर्च पर सवाल-जवाब करती है।
अब जांच में अधिकारी भुस की मात्रा कम बता रहे हैं। खुद और ईओ के बीच मतभेद पर उन्होंने सिरे से नकारते हुए कहा कि ईओ से यह जरूर कहा था कि ऐसी नौबत क्यों आई। यदि चारा नहीं था तो उन्हें क्यों नहीं बताया गया। इन्हीं बातों का गलत अर्थ लगाकर रिपोर्ट में प्रस्तुत किया गया है। गोशाला के लिए जब ईओ, लिपिक व कर्मचारियों के कार्य नियत कर रखे हैं तो इसमें मेरी लापरवाही या कमी कहां से आ गई। अगर मेरा कोई दोष होता तो मैं मामले की सूचना डीएम-एसडीएम को क्यों देता, बल्कि मैं तो मामले को छिपाने की कोशिश करता।
हां, खुद की जान को खतरे की वजह से गोशाला का निरीक्षण करने ज्यादा नहीं जा पाया। अधिकारी कर्मचारी मुझे वहां के जो हालात ठीक बताते रहे, मैं मानता रहा। ईओ संदीप सक्सेना ने भी चेयरमैन से किसी प्रकार के मतभेद होने से साफ इंकार किया है। उनका कहना है कि गोशाला प्रभारी बाबू की लापरवाही से यह घटना हुई है, जिसमें कार्रवाई की जा रही है।
चेयरमैन संजीव अग्रवाल जनप्रतिनिधि की अपनी जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी से निभा रहे हैं। मामले में ईओ व संबंधित बाबू की जिम्मेदारी बनती है कि भूसा चारा की व्यवस्था उन्होंने गोशाला में क्यों नहीं की। गोशालाओं पर मुख्यमंत्री प्राथमिकता से ध्यान दे रहे हैं, ऐसे में गोशाला का निरीक्षण करने किसी अधिकारी का न पहुंचना बड़ी लापरवाही है। पूरे मामले में वह जिलाधिकारी से बात करेंगे तथा दोषियों के खिलाफ कार्यवाही कराएंगे।
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- अनूप प्रधान, विधायक खैर
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