ग्रीष्मावकाश के बाद बृहस्पतिवार को परिषदीय विद्यालय खुल गए। पहले दिन ज्यादातर विद्यालयों में बच्चे नहीं आए तो कुछ में गिनती के ही बच्चे पहुंचे। भीषण गर्मी में बच्चों को परेशानी हुई व पसीने से तरबतर दिखाई दिए। कई विद्यालयों में मध्याह्न भोजन भी नहीं पका। वहीं, शिक्षक-शिक्षिकाओं ने अपनी छुट्टियों के अनुभवों को साझा किया।
गर्मी की छुट्टियों के बाद पहले दिन बच्चे और शिक्षक विद्यालय पहुंचे। सबसे विद्यालयों की साफ-सफाई कराई गई। उसके बाद पढ़ाई शुरू हुई, लेकिन बच्चों के पास पाठ्य पुस्तकें नहीं थीं। दरअसल, विभाग अभी तक पुस्तकें खरीद नहीं पाया है। छुट्टियां होने से पहले जो विद्यालय खुलने का समय था, उसी के अनुसार छुट्टियों के बाद भी रहा।
सुबह 7:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक बच्चों का शिक्षण कार्य निर्धारित है, जबकि 1:30 बजे तक शिक्षक-शिक्षिकाओं की उपस्थिति रही। प्राथमिक विद्यालय जलालपुर चंडौस, बालक प्राथमिक पाठशाला नंबर 44, 29, 41 बेलामार्ग नगर क्षेत्र, कन्या पाठशाला नंबर-14, बालक पाठशाला नंबर-39, कन्या पाठशाला नंबर-22 सहित कई विद्यालयों में बच्चों की उपस्थिति शून्य रही।
इसी तरह कंपोजिट विद्यालय लेखराजपुर में पंजीकृत 295 में से 32, कंपोजिट विद्यालय जलाली धनीपुर में पंजीकृत 573 में से 15, प्राथमिक विद्यालय टमकोली जवां में पंजीकृत 210 में से दो, कंपोजिट विद्यालय नदरोई में पंजीकृत 116 में से 36 सहित ज्यादातर विद्यालयों में बच्चों की उपस्थिति आशा के विपरीत कम रही।
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला मंत्री मुकेश कुमार सिंह व उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. प्रशांत शर्मा ने कहा कि भीषण गर्मी में छोटे-छोटे बच्चों, शिक्षक और शिक्षिकाओं का विद्यालय आना उनके स्वास्थ्य के हित में ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि जब मौसम अनुकूल हो जाता, तब विद्यालय खोलना चाहिए।
- ग्रीष्मावकाश के बाद विद्यालय खुल गए हैं। पहले दिन बच्चों की उपस्थिति कम रही है। धीरे-धीरे बच्चों की तादाद बढ़ेगी। बच्चों और उनके अभिभावकों को विद्यालय खुलने की जानकारी दी जाएगी। बच्चों को जुलाई में नई पाठ्य पुस्तकें मिल जाएंगी।
- सतेंद्र कुमार, बीएसए