आगरा में बरामद हुई नकली आक्साल्जिन-डीपी टैबलेट के मामले में जांच तेजी से आगे बढ़ रही है। सिंडिकेट के नेटवर्क, सप्लाई चेन और वित्तीय लेनदेन (हवाला) से जुड़े कई अहम सबूत जुटाए गए हैं। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।-दीपक लोधी, ड्रग्स इंस्पेक्टर
छापे में हुआ खुलासा, मोबाइल ने उगले राज
इस बड़े सिंडिकेट का पर्दाफाश तब हुआ जब आगरा के कम्मू टोला स्थित श्री मेडिकल एजेंसीज पर ड्रग्स विभाग ने छापा मारा। वहां से भारी मात्रा में नकली आक्साल्जिन-डीपी बरामद हुई। फर्म के संचालक सुरेंद्र गुप्ता ने सख्ती से हुई पूछताछ में अलीगढ़ के निरंजनपुरी रामघाट रोड निवासी मयंक गुप्ता किट्टू का नाम उगला।
शुरुआत में मयंक अधिकारियों को गुमराह करता रहा, लेकिन जब उसका मोबाइल खंगाला गया तो सुरेंद्र गुप्ता का नंबर एस नाम से सेव मिला। मयंक के व्हाट्सएप से पिछले साल की एक खबर की कटिंग भी मिली है, जो नकली दवाओं के पकड़े जाने से जुड़ी थी। इससे साफ है कि आरोपी पहले से ही सतर्क थे।
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, मयंक ने साल 2011 में अपना दवाओं का लीगल काम बंद कर दिया था। अब पुलिस और जांच एजेंसियां इस बात की तहकीकात कर रही हैं कि पिछले 15 साल से मयंक आखिर कौन सा कारोबार कर रहा था। इसके अलावा, इस सिंडिकेट के तार दिल्ली और राजस्थान में पहले पकड़ी गई नकली दवाओं की खेप से भी जोड़े जा रहे हैं।