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Medicine: अलीगढ़ का मयंक था मास्टरमाइंड, उत्तराखंड में बनती थीं नकली दवाएं, मोबाइल ने उगले राज

Thu, 28 May 2026 12:08 PM IST
Chaman Kumar Sharma अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

पकड़े जाने से बचने के लिए आरोपी बेहद शातिर तरीका अपनाते थे। नकली दवाओं की खेप को किसी प्राइवेट कूरियर के बजाय सरकारी रोडवेज बसों के जरिए आगरा भेजा जाता था। दोनों कारोबारी आपस में सिर्फ व्हाट्सएप कॉल पर बात करते थे, ताकि कॉल रिकॉर्ड न निकाली जा सके।
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नकली दवाएं - फोटो : Freepik.com
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विस्तार
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आगरा में पकड़े गए करोड़ों रुपये के नकली दवा रैकेट के तार अब अलीगढ़ से पूरी तरह जुड़ चुके हैं। ड्रग्स विभाग और पुलिस की संयुक्त जांच में जो सनसनीखेज खुलासे हुए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। इस पूरे सिंडिकेट का मास्टरमाइंड अलीगढ़ का रहने वाला मयंक गुप्ता उर्फ किट्टू है, जो उत्तर प्रदेश में बैठकर उत्तराखंड के रूड़की की एक सीक्रेट फैक्टरी से नकली दवाओं का काला कारोबार संचालित कर रहा था।

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जांच में सामने आया है कि मयंक गुप्ता ने महज एक साल, अप्रैल 2025 से अब तक के भीतर आगरा के दवा कारोबारी को 1.78 लाख से अधिक नकली आक्साल्जिन-डीपी टैबलेट की स्ट्रिप बेचीं। सामने आया है कि पकड़े जाने से बचने के लिए आरोपी बेहद शातिर तरीका अपनाते थे। नकली दवाओं की खेप को किसी प्राइवेट कूरियर के बजाय सरकारी रोडवेज बसों के जरिए आगरा भेजा जाता था।

दोनों कारोबारी आपस में सिर्फ व्हाट्सएप कॉल पर बात करते थे, ताकि कॉल रिकॉर्ड न निकाली जा सके। लाखों रुपये के इस अवैध लेनदेन के लिए हवाला नेटवर्क का इस्तेमाल होता था। भुगतान के समय पांच रुपये के नोट का नंबर कोडवर्ड के तौर पर बताया जाता था, जिसके बाद ही कैश डिलीवर होता था। यह पेमेंट अलीगढ़ के रामघाट रोड और हाथरस रोड पर किया जाता था।

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आगरा में बरामद हुई नकली आक्साल्जिन-डीपी टैबलेट के मामले में जांच तेजी से आगे बढ़ रही है। सिंडिकेट के नेटवर्क, सप्लाई चेन और वित्तीय लेनदेन (हवाला) से जुड़े कई अहम सबूत जुटाए गए हैं। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।-दीपक लोधी, ड्रग्स इंस्पेक्टर

छापे में हुआ खुलासा, मोबाइल ने उगले राज
इस बड़े सिंडिकेट का पर्दाफाश तब हुआ जब आगरा के कम्मू टोला स्थित श्री मेडिकल एजेंसीज पर ड्रग्स विभाग ने छापा मारा। वहां से भारी मात्रा में नकली आक्साल्जिन-डीपी बरामद हुई। फर्म के संचालक सुरेंद्र गुप्ता ने सख्ती से हुई पूछताछ में अलीगढ़ के निरंजनपुरी रामघाट रोड निवासी मयंक गुप्ता किट्टू का नाम उगला।

शुरुआत में मयंक अधिकारियों को गुमराह करता रहा, लेकिन जब उसका मोबाइल खंगाला गया तो सुरेंद्र गुप्ता का नंबर एस नाम से सेव मिला। मयंक के व्हाट्सएप से पिछले साल की एक खबर की कटिंग भी मिली है, जो नकली दवाओं के पकड़े जाने से जुड़ी थी। इससे साफ है कि आरोपी पहले से ही सतर्क थे।

पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, मयंक ने साल 2011 में अपना दवाओं का लीगल काम बंद कर दिया था। अब पुलिस और जांच एजेंसियां इस बात की तहकीकात कर रही हैं कि पिछले 15 साल से मयंक आखिर कौन सा कारोबार कर रहा था। इसके अलावा, इस सिंडिकेट के तार दिल्ली और राजस्थान में पहले पकड़ी गई नकली दवाओं की खेप से भी जोड़े जा रहे हैं।
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