पुलिस थानों में शिकायतों का समाधान नहीं होने, मुकदमा दर्ज कराने में दबाव, किसी एक पक्ष के लिए पुलिस की पैरवी, मुकदमे की विवेचना जांच प्रभावित करने की शिकायतों पर एसएसपी मुनिराज जी ने खुद अपने स्तर पर जांच पड़ताल करनी शुरू कर दी है। अब वह आने वाली शिकायत पर दोनों पक्षों के साथ मुकदमे के विवेचक को बुलाने लगे हैं। जब तीनों पक्ष आमने सामने मौजूद होते हैं तो अनर्गल आरोप खत्म होने लगते हैं। केवल वास्तविक घटना पर बात शुरू होती है। जिससे एसएसपी को समझौते या कार्रवाई के आधार पर मामलों का निस्तारण कराने में मदद मिल रही है।
एसएसपी दफ्तर पर कुछ फरियादी ऐसे भी आते हैं जो कई महीनों से चक्कर लगा रहे हैं। पर किसी न किसी स्तर पर उनकी फरियाद निस्तारित नहीं हो पाती या फरियादी संतुष्ट नहीं हो पाता। इसी समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए ये तरीका ईजाद किया गया। दोनों पक्षों और संबंधित थानेदार या दरोगा को बुलाकर एसपी क्राइम की मौजूदगी में पंचायत कराई जाती है। खुद एसएसपी उसकी मॉनिटरिंग करते हैं। इस तरह से कुछ बेहद पुराने प्रकरण निपटाए जा रहे हैं। इस तरह से बन्ना देवी थाने के एक प्रापर्टी मामले में वर्ष 2009 से दोनों पक्ष संबंधित संपत्ति को अपना अपना बता रहे हैं। एक पक्ष ने पुलिस पर दूसरे पक्ष का साथ देने का आरोप लगाया है।
इसी तरह से इगलास थाने के एक गोली मारने के मामले में मुख्य आरोपी लगातार छह सात महीने से कह रहा है कि वह घटना के वक्त अलीगढ़ में था और उसको पुलिस ने फंसा दिया है। उक्त दोनों मामलों में एसएसपी इसी तरह से जांच कर रहे हैं। वहीं खैर में सीओ मोहसिन खान द्वारा जो जनता संवाद मानपुर कला में कराया गया था उसी तरह के संवाद सभी थाना क्षेत्र में कराने का प्रयास है ताकि अधिकारियों के यहां शिकायतें पहुंचने की संख्या कम हो सके।