निर्माण कार्यों से भी बढ़ रही धूल
शहर में जगह-जगह चल रहे सड़क निर्माण, भवन निर्माण, खोदाई और खुले स्थानों पर जमा मिट्टी से उड़ने वाली धूल भी प्रदूषण बढ़ा रही है। रामघाट रोड समेत कई निर्माणाधीन इलाकों में वाहन गुजरने के साथ धूल दोबारा हवा में घुल रही है। बारिश बंद होने के बाद सड़कों पर जमा धूल की मात्रा बढ़ने से स्थिति और खराब हो रही है।
वाहनों और उद्योगों का धुआं भी जिम्मेदार
शहर में डीजल और पेट्रोल वाहनों से निकलने वाला धुआं, औद्योगिक इकाइयों का उत्सर्जन, घरेलू ईंधन और खुले में कचरा जलाना भी प्रदूषण के प्रमुख स्रोत हैं। सामान्य दिनों में इनका असर उतना स्पष्ट नहीं दिखता, लेकिन सर्दियों में हवा की रफ्तार कम होने और तापमान में बदलाव के कारण प्रदूषक वातावरण में ही फंसे रह जाते हैं।
सबसे अधिक प्रदूषित क्षेत्र
रामघाट रोड पीएसी, क्वार्सी चौराहा, बन्ना देवी नुमाइश मैदान, आईटीआई रोड, सासनी गेट औद्योगिक क्षेत्र, एटा चुंगी, सारसौल चौराहा, गड़िया एलमपुर, बरौला बाईपास, फिरदौस नगर, एएमयू किला रोड, देहली गेट, लाल मस्जिद, रोरावर, भुजपुरा, मथुरा रोड
क्या कहता है एएमयू का मापन
एएमयू के सिविल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट में लगे वायु प्रदूषण मापक यंत्र में पीएम-10 की मात्रा 194.9, पीएम-2.5 की मात्रा 60.69, सल्फर डाई आक्साइड 24.50 और नाइट्रोजन डाईआक्साइड 303.35 प्रति घनमीटर तक दर्ज हुई है। अगर वातावरण साफ सुथरा हो तो पीएम-10 की मात्रा 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर या इससे कम, पीएम-2.5 की मात्रा 60 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर, नाइट्रोजन डाईऑक्साइड 80 और सल्फर डाईऑक्साइड 80 माइक्रोग्राम या इससे कम होनी चाहिए। अलीगढ़ में पीएम-10, पीएम 2.5 और नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ी हुई मिल रही है। जिससे वायु प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है