मूल रूप से सिकंदराराऊ ( हाथरस ) निवासी सरकोड़ा परिवार के मुखिया सुरेश चंद्र वार्ष्णेय व उनकी धर्मपत्नी सौभाग्यवती वार्ष्णेय ने वर्ष 1983 में बेटे उमेश सरकोड़ा व राजेश सरकोड़ा को पढ़ने के लिए अलीगढ़ भेजा था। यहीं वर्ष 1989 में बड़े बेटे उमेश सरकोड़ा ने गोपालपुरी में सरकोड़ा का कारखाना लगाया। इसके बाद परिवार पला रोड, सासनीगेट पर रहने लगा। परिवार में चार पीढ़ी शामिल हैं और इसमें 22 सदस्य एक साथ ही रहते हैं। उमेश सरकोडा के बाद छोटे भाई राजेश व मुकेश बंशी भी इस काम में बड़े भाई के साथ जुड़ गए। इस व्यवसाय को गगनेश, सचिन एवं लवलेश ने नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने का काम किया। परिवार में उमेश चंद्र सरकोडा, पूनम सरकोड़ा, राजेश सरकोड़ा, प्रीति सरकोड़ा, मुकेश सरकोड़ा बंशी, पूनम वार्ष्णेय पौत्र- पौत्र वधू गगनेश वार्ष्णेय, आकांक्षा वार्ष्णेय, सचिन वार्ष्णेय, अर्चिता वार्ष्णेय, लवलेश वार्ष्णेय, आकृति वार्ष्णेय, पाैत्र अभय वार्ष्णेय, पौत्री रिया वार्ष्णेय, अंचला वार्ष्णेय, प्रिया वार्ष्णेय, पंती एवं पंतिनी विआन,अव्यान, प्रिशा शामिल हैं।
एक ही घर में रहते हैं 21 लोग
शहर के अचलताल स्थित बजरंग मार्केट में रहने वाले संस्कार भारती संस्था के संस्थापक व टेलरिंग का व्यवसाय करने वाले राजाराम मित्र का भरा पूरा परिवार है। इसमें 21 सदस्य शामिल हैं। पूरा परिवार एकता के सूत्र में बंधा हुआ है। परिवार के सदस्य गन हाउस, स्टेशनरी, पीतल मूर्ति शोरूम के कारोबार के साथ ही समाजसेवा के क्षेत्र में विभिन्न सामाजिक संस्थाओं से जुड़े हुए हैं। भले ही सबके कारोबार अलग-अलग हों, लेकिन घर की छत एक ही है और खाना भी एक ही रसोई में बनता है। खुशियों के सारे तीज, त्योहार भी सभी मिलकर मनाते हैं। राजा राम मित्र के परिवार में नितिन वार्ष्णेय, सरिता वार्ष्णेय, रतन वार्ष्णेय मित्र, ममता गुप्ता, विपिन राजाजी, वंदना वार्ष्णेय, भुवनेश वार्ष्णेय आधुनिक, दीपिका वार्ष्णेय, रंजन वार्ष्णेय आधुनिक, अंजना वार्ष्णेय, वरुण वार्ष्णेय, मोनिका, सक्षम वार्ष्णेय, अभिनव वार्ष्णेय, तनिष्क वार्ष्णेय, मोहित वार्ष्णेय, लव वार्ष्णेय, शुभांगी वार्ष्णेय, यशी वार्ष्णेय शामिल हैं।