75 माइक्रोन से कम क्षमता वाली पॉलिथीन पर प्रतिबंध लागू हो गया है। मगर अभी भी बाजार में पॉलिथीन बिक रही है। यह बात अलग है कि कोई ग्राहक अगर पॉलिथीन खरीदने जाए तो उसे दुकानदार माल नहीं देगा। मगर उनके एजेंट बाजार में सक्रिय हैं। उन एजेंटों के जरिये ही फुटकर विक्रेताओं और ठेल - ढकेल वालों तक पॉलिथीन पहुंच रही है। शनिवार को शहर के अलग अलग हिस्सों के बाजार में अमर उजाला ने इसकी पड़ताल की तो सच सामने आया।
इस तरह से मिला दुकानदारों से जवाब
दोपहर 12 अमर उजाला प्रतिनिधि सामान्य ग्राहक बनकर गुड़ मंडी में एक थोक किराना विक्रेता के पास पहुंचा। उसने दुकानदार से पॉलिथीन मांगी। दुकानदार ने साफ इंकार कर दिया। इसके बाद करीब तीस मिनट तक उस दुकान पर निगरानी रखी तो देखा कि वह कपड़े के कैरीबैग में सामान अन्य ग्राहकों को दे रहा था।
एक बजे अब्दुल करीम चौराहे के थोक पॉलिथीन विक्रेता के पास पहुंचकर पांच किलो पॉलिथीन मांगी। मगर वहां से भी मना कर दिया गया। यहां अन्य ग्राहकों से भी इसी तरह मना किया जा रहा था। हां, वे अन्य प्लास्टिक उत्पाद बेच रहे थे, जो प्रतिबंधित नहीं हैं।
इसी तरह महावीरगंज पुलिस चौकी के पास एक किराना स्टोर से दो किलो वाली पॉलिथीन मांगी तो वहां से भी मना कर दिया गया। थोक बाजार छिपैटी के एक पॉलिथीन दुकानदार के यहां भी पॉलिथीन नहीं मिली। मदार गेट के डिस्पोजल विक्रेता ने कह दिया कि एक सप्ताह बाद नए उत्पाद बाजार में आएंगे, तभी माल मिल पाएगा।
इस तरह पहुंच रहा फुटकर व ठेल-ढकेल वालों पर माल
अमर उजाला प्रतिनिधि ने जब बाजार में भ्रमण के दौरान कहीं पॉलिथीन नहीं मिलने पर ज्यादा प्रयास तिया तो एक दुकानदार ने इशारे में बताया कि आपको माल सीधे नहीं मिलेगा। कुछ एजेंट सक्रिय हैं। उनके जरिये माल दुकानों व ठेल-ढकेल पर पहुंच रहा है। एक एजेंट सुबह करीब 9 बजे स्कूटी पर आता है।
वह थोक बाजार से माल लेकर फुटकर वालों को पहुंचाता है। इसी तरह एक एजेंट मोपेड पर करीब 11 बजे आता है। वह भी फुटकर वालों व ठेल-ढकेल वालों तक माल पहुंचाता है। आपको उन्हीं से संपर्क करना होगा। वही माल दिलवा सकता है। क्वार्सी के आसपास के इलाकों में पॉलिथीन की सप्लाई पहुंचाने के लिए साइकिल पर एक एजेंट चलता है। वह उसी इलाके में आपूर्ति दे रहा है।
स्टाक खपाने में लगे हैं थोक विक्रेता
दिल्ली से नया माल नहीं आ रहा है। थोक व अन्य पॉलिथीन सप्लायरों पर पहले से स्टाक रखा हुआ है। उसे बाजार में खपाया जा रहा है। ज्यादातर लोग दो - चार दिन माहौल भांपने में लगे हैं। 3 जुलाई के बाद क्या तस्वीर बनने वाली है। उसे देखने के बाद ही माल दिल्ली से आना शुरू होगा। अभी सभी अपना अपना स्टाक एजेंट के जरिये खपाने में लगे हैं।
- जो लोग चोरी छिपे माल बेच रह हैं, उनके बारे में े कुछ कहा नहीं जा सकता। मगर हमने पूरी तरह प्रतिबंधित माल की बिक्री रोक दी है। अब उनके विकल्प उत्पादों का इंतजार किया जा रहा है। अभी उसी माल को बेचा जा रहा है, जिस पर प्रतिबंध नहीं है। - बॉबी, थोक प्लास्टिक उत्पाद विक्रेता, अब्दुल करीम चौराहा
कपड़े के कैरीबैग के भाव जानने लगे दुकानदार
पॉलिथीन पर प्रतिबंध के बीच दुकानदार कपड़े के कैरीबैग की जानकारी करने में लगे हैं। अभी ऑर्डर मिलना शुरू नहीं हुआ है। निरंजनपुरी में कपड़े के बैग का निर्माण करने वाले संतोष शर्मा बताते हैं कि अभी नया ऑर्डर नहीं आया है, मगर कुछ बड़े दुकानदार जो अपने उत्पाद का ब्रांड नेम छपवाकर कैरीबैग में सामान देते हैं, वे कीमत जरूर पूछ रहे हैं। संतोष का कहना है कि पॉलिथीन से कपड़े का बैग महंगा होता है। इसलिए आम व्यापारी अपने हानि लाभ के आधार पर ही बिक्री करेंगे। अभी कपड़े के बैग वाले बाजार पर अधिक असर दिखाई नहीं दे रहा है।