समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक वीरेश यादव की एमपी/एमएलए कोर्ट से तीन अलग-अलग मुकदमों में अग्रिम जमानत अर्जियां खारिज कर दी गई हैं। तीनों मुकदमे दादों थाने से संबंधित हैं, जिनमें दो में हमले व एक में गाली-गलौज व धमकी का आरोप है।
करीब डेढ़ दशक पुराने इन मुकदमों में न्यायालय ने पिछले माह गैर जमानती वारंट जारी कर एसएसपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश करने के निर्देश दिए थे। गिरफ्तारी के डर से ही पूर्व विधायक की ओर से अग्रिम जमानत अर्जी दायर की गई थीं, जिन्हें न्यायालय ने खारिज कर दिया है।
अपर जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी रामकुमार के अनुसार मूल रूप से बीनापुर पालीमुकीमपुर निवासी वीरेश यादव पर दादों थाने में तीन अलग-अलग मुकदमे दर्ज हैं। जिनमें हमले का एक मुकदमा वर्ष 1997 में शिवकुमार गुप्ता ने दर्ज कराया था।
दूसरा भी 21 जुलाई 1998 को दर्शन सिंह निवासी हुसैनपुर ने हमले का दर्ज कराया था और तीसरा 25 मई 1997 को रमाशंकर ने एकराय होकर गाली व धमकी देने का दर्ज कराया था। पिछले माह गैर जमानती वारंट जारी करते हुए एडीजे-4 एमपी/एमएलए कोर्ट ने यह टिप्पणी की थी कि चूंकि वीरेश यादव तीन-तीन बार विधायक रहे हैं।
इसलिए इस प्रभाव में न्यायालय में हाजिर नहीं हुए। इन्हें गिरफ्तार कर पेश किया जाए। न्यायालय के इस आदेश के बाद गिरफ्तारी के डर से उन्होंने अग्रिम जमानत अर्जियां दायर कीं। एडीजीसी के अनुसार न्यायालय ने गंभीर व काफी पुराने मुकदमे होने के कारण अग्रिम जमानत अर्जियां खारिज कर दी हैं। एडीजीसी ने बताया कि अब उनके खिलाफ जारी गैर जमानती वारंट लागू हैं। ऐसे में पुलिस भी गिरफ्तारी कर सकती है। या वे खुद सरेंडर कर जमानत पा सकते हैं।