अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के जेएन मेडिकल कॉलेज में एसोफेजक्टॉमी से कैंसर रोगी का इलाज किया गया, क्योंकि मरीज का वजन तेजी से कम हो रहा था और वह भोजन या तरल पदार्थ निगलने और चलने में खुद को असमर्थ महसूस कर रहा था।
मथुरा जिले के सुरेश चंद का स्वास्थ्य खराब था। ऐसे में सुरेश चंद ने एएमयू के जेएन मेडिकल कॉलेज के सर्जरी विभाग से संपर्क किया, जहां एसोफेजल कैंसर का पता लगने के बाद एक बहुस्तरीय प्रबंधन और जटिल एसोफेजक्टॉमी प्रक्रिया के बाद उसका सफलतापूर्वक इलाज किया गया।
डॉ. वासिफ मोहम्मद अली ने डॉ. मंजूर अहमद, डॉ. उबैद (एनेस्थेटिस्ट) प्रो. मोहम्मद आजम हसीन, डॉ. मयंक (सीटीवीएस सर्जन) सहित डॉक्टरों की एक टीम के साथ यह कठिन और दुर्लभ सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। उन्होंने कहा कि जेएनएमसी में सस्ती और पर्याप्त स्वास्थ्य देखभाल के कारण सुरेश चंद ठीक हो गए हैं और जल्द ही अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी।
इस प्रक्रिया को प्रो. सैयद अमजद अली रिजवी के मार्गदर्शन में अंजाम दिया गया। डॉ. वासिफ ने कहा कि मरीज के कैंसरयुक्त भोजन नली को शल्य चिकित्सा से हटा दिया गया था। उन्होंने कहा कि सर्जरी पूर्व जांच से पता चला कि कैंसर लिम्फ नोड्स में फैल चुका था और सर्जरी से पहले रोगी को तीन से चार महीने कीमोथेरेपी के लिए सिफारिश की थी। प्रो. रिजवी ने कहा कि एसोफेजक्टॉमी साधारण ऑपरेशन नहीं है और इसके लिए लंबे समय तक अस्पताल में रहने की आवश्यकता हो सकती है।