मिशन शक्ति अभियान के तहत अपना जिला महिला अपराध से संबंधित अपराधियों को सजा दिलाने में तीसरे पायदान पर रहा है। सर्वाधिक 149 सजा हुई हैं। इसे लेकर शासन स्तर से अलीगढ़ के अधिकारियों व अभियोजन अधिवक्ताओं की पीठ ठोंकी गई है।
वहीं जिले के अन्य अपराध में 75 सजा पर जिला दूसरे स्थान पर रहा। वहीं अब नया लक्ष्य मिशन शक्ति अभियान के तहत बुधवार से दे दिया गया है। नया अभियान अप्रैल माह से शुरू किया जा रहा है। इसे लेकर अपर मुख्य सचिव ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये आवश्यक दिशा निर्देश दिए और कहा कि 100 दिन का लक्ष्य तय किया है, जिसे हमें हर हाल में पूरा करना है।
अपर मुख्य सचिव अवनीश कुमार अवस्थी द्वारा वीडियो कांफ्रेंसिंग द्वारा प्रदेश के सभी जिलों के डीएम-एसएसपी के अलावा अभियोजन अधिकारियों, डीजीसी फौजदारी व मिशन शक्ति से संबंधित मुकदमों में लगे एडीजीसी की बैठक ली गई। इस दौरान निर्देशित किया गया कि पिछले अभियान में जिस तरह से काम किया है।
उसी तरह से इस अभियान में भी काम किया जाए। टिप्स दिए गए कि जिन मुकदमों में गवाहों की संख्या कम है या जिनमें गवाही आदि की औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं। उनमें जल्द से जल्द निस्तारण कराकर अधिक से अधिक सजा कराने का प्रयास किया जाए।
साथ में कहा कि आने वाले सौ दिन में अभियोजन स्तर से काम हुआ है। ऐसा इस अभियान में दिखाई दे। इस अभियान में मिशन शक्ति में महिला अपराध के अलावा गैंगेस्टर, शराब आदि में भी सजाएं करानी हैं। अलीगढ़ से इस बैठक में डीएम सेल्वा कुमारी जे, एसएसपी कलानिधि नैथानी, डीजीसी फौजदारी धीरेंद्र सिंह तोमर, जेडी अभियोजन सुशील कुमार सिंह सहित समस्त अभियोजन अधिकारी व एडीजीसी मौजूद रहे।
जहरीली शराब पर हुआ जिक्र, जल्द सजा का लक्ष्य
अपर मुख्य सचिव ने इस दौरान अलीगढ़ के जहरीली शराब कांड का भी जिक्र किया। इस दौरान उन्होंने इस प्रकरण में जल्द से जल्द सजा कराने पर जोर दिया। इस घटना में कुल सूचीबद्ध 33 मुकदमों में से ऐसे मुकदमे चिह्नित करने के निर्देश दिए गए, जिनमें कम गवाह हैं। उनकी गवाही कराकर जल्द सजा कराने पर जोर दिया गया।
अभियोजन शाखा की पैरवी का परिणाम, गैंगेस्टर में 14 को सजा
जघन्य अपराधों में गैंगेस्टर के तहत कार्रवाई के बाद पुलिस इन मुकदमों को भुला देती है। मगर इस बार एसएसपी कलानिधि नैथानी के स्तर से हुई समीक्षा और संयुक्त निदेशक अभियोजन के निर्देशन में हुई पैरवी का परिणाम रहा कि लंबे समय से लंबित गैंगेस्टर के 11 मुकदमों में 14 अपराधियों को सजा हुई है। ये सभी सजाएं वर्ष 2022 में ऑपरेशन प्रहार के तहत अब तक हुई हैं।
पुलिस प्रवक्ता के अनुसार एसएसपी स्तर से लगातार गैंगेस्टर मुकदमों की समीक्षा की गई। जिसके तहत संयुक्त निदेशक अभियोजन के निर्देशन में बेहतर विवेचना और मजबूत पैरवी का परिणाम रहा कि गैंगेस्टर के 11 मुकदमे इस वर्ष में अब तक निर्णित हुए और उनमें 14 अपराधियों को सजा हुई।
गैंगेस्टर के इन मुकदमों में हुई सजा
-मडराक के 2010 के मुकदमे में रन सिंह जाट को 3 वर्ष की सजा।
-बन्नादेवी के 2014 के मुकदमे में अहमद हसन को 6 वर्ष की सजा।
-बरला के 1993 के मुकदमे में कल्याण को 2 वर्ष की सजा।
-बन्नादेवी के 2014 के मुकदमे में संजय को 6 वष की सजा।
-देहली गेट के 2018 के मुकदमे में बलिया उर्फ बली मो. को ढाई वर्ष की सजा।
-क्वार्सी के 2019 के मुकदमे में बबलू पठान, इशाक व आशू को ढाई वर्ष की सजा।
-क्वार्सी के 2019 के मुकदमे में सतपाल व थाना सिंह को 3 वर्ष की सजा।
-अकराबाद के 2017 के मुकदमे में बलवीर उर्फ बलुआ को 4 वर्ष की सजा।
-क्वार्सी के 2019 के मुकदमे में दशरथ को 3 वर्ष की सजा।
-टप्पल के 2020 के मुकदमे में प्रवीन को 2 वर्ष की सजा।
-सिविल लाइंस के 2018 के मुकदमे में दीपक को साढ़े तीन वर्ष की सजा।
- समस्त क्षेत्राधिकारी/ थाना प्रभारियों को गंभीर अपराधों में अभियुक्तों को शत-प्रतिशत सजा दिलाने व प्रभावी पैरवी करने के लिए निर्देशित किया गया है। इसी का परिणाम है कि गैंगेस्टर के मुकदमों में ये सजा हुई हैं। आगे ये प्रयास जारी रहेगा। -कलानिधि नैथानी, एसएसपी