उत्तर प्रदेश में मॉनसून की दस्तक के साथ ही अलीगढ़ जिला प्रशासन गौ सेवा और सुरक्षा के लिए पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। जिलाधिकारी अविनाश कुमार ने कड़े निर्देश जारी करते हुए कहा है कि बारिश के मौसम में निराश्रित गोवंशों की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। जिले के सभी गौ आश्रय स्थलों को हाई-अलर्ट पर रखते हुए विशेष प्रबंध करने के आदेश दिए गए हैं।
डीएम ने चेतावनी दी है कि किसी भी गौशाला में जलभराव या कीचड़ जैसी अव्यवस्था बर्दाश्त नहीं की जाएगी। नगर निगम, पशुपालन विभाग, खंड विकास अधिकारियों और ग्राम पंचायतों को शासन के नियमों का अक्षरशः पालन करने की हिदायत दी है। उन्होंने कहा कि हर गौ आश्रय स्थल पर बारिश से बचने के लिए पर्याप्त सूखी जगह और बेहतरीन जल निकासी की व्यवस्था हो। गोवंशों के लिए साफ पीने का पानी और चारे को भीगने से बचाने के लिए सुरक्षित भंडारण सुनिश्चित किया जाए। अफसर केवल कागजों पर काम न करें, बल्कि व्यवस्थाओं की नियमित रूप से ग्राउंड मॉनिटरिंग भी करें।
30 जून तक टीकाकरण का अल्टीमेटम
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. दिवाकर त्रिपाठी ने बताया कि बरसात में फैलने वाली संक्रामक और वेक्टर-जनित (मच्छर-मक्खी से होने वाली) बीमारियों से गोवंशों को बचाना सबसे बड़ी चुनौती है। इसके लिए विभाग ने तगड़ा प्लान तैयार किया है। अगर कोई गाय बीमार होती है, तो उसके लिए अलग से 'आइसोलेशन कक्ष' की व्यवस्था की जाएगी। गौशालाओं में नियमित रूप से कीटनाशक दवाओं और फॉगिंग का छिड़काव होगा।
इमरजेंसी बैकअप
अत्यधिक भारी बारिश या बाढ़ जैसी आपदा की स्थिति में 'आपदा प्रबंधन विभाग' के साथ मिलकर तत्काल वैकल्पिक और सुरक्षित व्यवस्थाएं की जाएंगी।
सोलर लाइट और 'ग्रीन' आवरण से सवरेंगी गौशालाएं
गौ संरक्षण केंद्रों को न सिर्फ सुरक्षित बल्कि पर्यावरण के अनुकूल भी बनाया जा रहा है। डॉ. त्रिपाठी के अनुसार, बिजली कटने पर भी अंधेरा न हो, इसलिए सौर ऊर्जा आधारित प्रकाश व्यवस्था की जाएगी। परिसर के बाहर सहजन, करौंदा, नीम, पीपल और पाकड़ जैसे औषधीय व छायादार पौधे लगाए जाएंगे। पौधों की सुरक्षा के लिए मजबूत 'ट्री-गार्ड' भी लगेंगे। गायों के बैठने के फर्श और पानी पीने की चरही पर विशेष शेड व नियमित सफाई की जाएगी।