न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रकोप से शुक्रवार को ईदी देने का रिवाज सीमित ही रहा। घरों में सीमित मेहमान ही बधाई देने पहुंचे। युवाओं की टोलियों ने गलियों में महफिल सजाई। बाजारों में बंदी रही तो युवकों ने शहर का भ्रमण किया। थक हारकर युवा अपने घर पर पहुंचे। जबकि ईद मिलन से उलट लोगों ने फोन से बधाई देना ही उचित समझा।
बता दें कि ईद की नमाज के बाद लोग शहर के पार्क, सिनेमाघर, स्वीमिंग पूल, रेस्टोरेंट पर जाकर परिवार के साथ समय बिताया करते थे। वर्ष 2020 की तरह बाजार की बंदी थी तो ऐसे सार्वजनिक स्थानों पर कोई नहीं पहुंचा। पारिवारिक संबंध रखने वाले लोगों ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर रिश्तेदारों को ईद की बधाई दी। जबकि कई गली-मोहल्ले और अपार्टमेंटों से लोगों ने निकलना उचित नहीं समझा। कई मोहल्लों में युवाओं की टोली घर के बाहर मौज मस्ती करती मिली।
इस दौरान मास्क और सैनिटाइजर का पालन दिखा। चूंकि, मनोरंजन नहीं कर सके, इसीलिए युवाओं की टोलियों ने शहर भ्रमण किया। बाइकों पर इधर उधर घूमकर जब उबाऊ हो गए तो सभी अपने घर पहुंचे। जबकि कुछ दोस्तों ने शहर की सड़कों पर आकर मुलाकात की। लोग इधर उधर टहलते भी नजर आए। कुछ इलाकों में बच्चे झूले झूलते भी मिले। जबकि लोगों ने अपने फोटो साझा कर सोशल मीडिया पर ईद की शुभकामनाएं प्रेषित कीं।
सामाजिक ईदी देने के चलन की जगह लोगों ने फोन से बधाइयां दीं और दोस्त, रिश्तेदार व परिजनों के साथ बातचीत की। कुल मिलाकर लगातार दूसरे साल ईद का जश्न मनाने और मनोरंजन करने का सिलसिला थमा ही रहा। सभी ने दुआ की कि जल्द कोरोना संक्रमण खत्म हो, जिससे धार्मिक त्योहार धूमधाम से मनाए जा सकें।