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Aligarh : एक मां से दूसरी मां की पुकार..शादी भले न हो, पर मेरा बेटा मुझे स्वीकार

Sat, 02 May 2026 07:09 AM IST
दुष्यंत शर्मा अभिषेक शर्मा, अमर उजाला, अलीगढ़

सार

जीवन को समझने की 15 वर्ष की उम्र में दुष्कर्म के चलते गर्भवती हुई हाथरस के मुरसान क्षेत्र की नाबालिग कल तक अपनी मां के कहने पर गर्भपात कराने के लिए राजी थी, लेकिन बेटे को जन्म देने के बाद उसने अपनी मां के आगे बेटे की ममता की मनुहार रखी।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सांकेतिक तस्वीर
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विस्तार
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मां की ममता के आगे उम्र या हालात मायने नहीं रखते। जीवन को समझने की 15 वर्ष की उम्र में दुष्कर्म के चलते गर्भवती हुई हाथरस के मुरसान क्षेत्र की नाबालिग कल तक अपनी मां के कहने पर गर्भपात कराने के लिए राजी थी, लेकिन बेटे को जन्म देने के बाद उसने अपनी मां के आगे बेटे की ममता की मनुहार रखी। कहा भले ही जीवन भर अविवाहित रहना पड़े, मगर बेटा स्वीकार है। किसी भी परिस्थिति में अपने बेटे को पालेगी।

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जेएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती मां बनी नाबालिग पीड़िता की यह बाद खुद उसकी मां ने बताई। कहा कि इतनी कमउम्र में बेटी के गर्भवती होने पर हमने गर्भपात कराने के लिए हाईकोर्ट में अपील दायर की थी, मगर स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से समय रहते गर्भपात नहीं हो पाया। बुधवार को बेटी ने बेटे को जन्म दिया है। जच्चा-बच्चा को अलग अलग वार्ड (एचडीयू व एनआईसीयू) में रखा गया है, इसलिए उनकी बेटी अपने बेटे से मिलने के लिए बेताब है। अभी कमजोरी के चलते वह चल-फिर नहीं पा रही। चिकित्सकों ने भी मना किया है। बच्चे का भी इलाज चल रहा है। 

सवाल ये भी, घर पहुंचने पर क्या बनेंगे हालात
एक सवाल पीड़ित परिवार के मन में है कि नाबालिग पीड़िता अपने बेटे के साथ गांव पहुंचती है तो उसके साथ क्या हालात बनेंगे। परिवार आर्थिक रूप से बहुत कमजोर हैं। पिता के निधन के बाद मां की मजदूरी कर परिवार को पाल रही है। बड़ी बेटी का विवाह हो चुका है। नाबालिग पीड़िता के अलावा छोटे भाई-बहन हैं।

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