डिप्टी एसपी तंजील अहमद हत्याकांड में नाम आने के बाद एएमयू के डीएसडब्ल्यू छात्र आलमगीर हत्याकांड में फरार आरोपी मुनीर मेहताब पर अब डीजीपी स्तर से 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है। यह कार्रवाई अलीगढ़ पुलिस की रिपोर्ट और लंबे समय से आलमगीर कांड में मुनीर की फरारी के बाद की गई है। इधर, मुनीर की तलाश के हर संभव प्रयास जारी हैं। अलीगढ़, बिजनौर पुलिस के अलावा एसटीएफ की टीमें उसके अलीगढ़ और बटला के कनेक्शन खोजने में लगी हैं। यहां भी टीम डेरा डाले हुए है।
9 सितंबर 2015 को हुई आलमगीर की हत्या के बाद मुनीर पर 5 हजार का इनाम घोषित हुआ था और उसके घर की दो माह पूर्व कुर्की भी की गई। लगातार फरार रहे मुनीर को बटला व जामिया तक खोजने के बाद पुलिस जब वहां से दिल्ली पुलिस की मदद न मिलने पर खाली हाथ लौट आई तो उसे लेकर मुखबिरी जारी रही। मगर कोई सफलता हाथ नहीं लगी। इधर, अब तंजील अहमद हत्याकांड में नाम आने के बाद जब मुनीर सुर्खियों में आया तो पश्चिमी यूपी की पुलिस फिर उसे लेकर सतर्क हुई। तमाम प्रयास किए गए। चूंकि उसका नाम अभी तंजील कांड में शक में है। इसलिए उस मुकदमे में इनाम घोषित नहीं हो सकता था। इस वजह से आलमगीर हत्याकांड में उस पर 50 हजार का इनाम घोषित किया गया है।
एसएसपी अलीगढ़ ने इस संबंध में दो-तीन दिन पहले ही इनाम बढ़ाने की संस्तुति संबंधी रिपोर्ट भेजी, जिसके आधार पर यह निर्णय डीजीपी कार्यालय के स्तर से लिया गया है। एसएसपी जे रविंदर गौड़ बताते हैं कि मुनीर को सर्विलांस से पकड़ा जाना संभव नहीं है। पिछले छह माह की फरारी में हमारी टीम ने यह जान लिया कि वह मोबाइल का प्रयोग नहीं करता। उसे मुखबिरों या उसके कनेक्शनों की मदद से खोजने का काम चल रहा है।
कौन लोग उसके संपर्क में थे। आशुतोष से इस बीच कोई ऐसा संदिग्ध मिलने तो नहीं आया। इन तमाम बातों पर अध्ययन व निगरानी चल रही है।
देर शाम पहुंची मेरठ एसटीएफ टीम
अलीगढ़। मुनीर की तलाश में पश्चिमी यूपी, एनसीआर में ताबड़तोड़ दबिश अभियान जारी है। इसी क्रम में शनिवार देर शाम मेरठ एसटीएफ की टीम दो गाड़ियों में यहां पहुंच गई। टीम ने सिविल लाइंस, स्थानीय एसओजी से संपर्क कर उसके विषय में जानकारियां जुटाईं।