वितेंद्र के पिता हरी सिंह ने जीआरपी-आरपीएफ पर घायल बेटे को उपचार न दिला पाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उन्हें जब जीआरपी से खबर मिली तो वह कुछ ही देर में स्टेशन पहुंच गए। वहां लोगों से बातचीत में पता चला कि इस घटनाक्रम के बाद काफी देर में तो रेलवे अस्पताल से चिकित्सक को बुलाया जा सका। बाद में चिकित्सक भी उन्हें कहीं ले जाने के बजाय वहीं उपचार देने का प्रयास करते रहे। अगर अस्पताल ले जाते तो शायद बेटे को बचाया जा सकता था।
जीआरपी-आरपीएफ में दिखा विरोधाभास
इस दौरान जीआरपी और आरपीएफ में प्लेटफाॅर्म से शव हटाने को लेकर विरोधाभास की स्थिति देखने को मिली। मृत्यु के बाद भी शव काफी देर तक प्लेटफाॅर्म पर रखा रहा। इस पर भी परिवार ने नाराजगी जताई।
खबर पर दिल्ली से बेटी-बेटा, पत्नी भी आए
वितेंद्र कुमार अपनी पत्नी दीपशिखा, इंजीनियरिंग कर रहे बेटे यश व दसवीं की पढ़ाई कर रही बेटी जयंती को लेकर दिल्ली में रहते थे। उन्होंने दिल्ली के द्वारिका इलाके में मकान ले रखा था। वह हंसी-खुशी पिता से मिलने अलीगढ़ के लिए निकले थे, मगर शाम को उनकी मृत्यु की खबर परिवार को मिली। दिल्ली से परिजन भी अलीगढ़ पहुंच गए थे। परिवार का हाल बेहाल था। परिवार से मिली जानकारी के अनुसार वितेंद्र की मां का कोराना काल में देहांत हो गया था। तब से पिता यहां अकेले रहते हैं।