धुआं, धूल और धुंध भरी हवा के चलते अब लोगों को सांस के अलावा आंख, कान और नाक की तकलीफें भी बढ़ गई हैं। शनिवार को मलखान सिंह जिला अस्पताल में ही आंख, नाक और कान के 300 से अधिक मरीज आए। जबकि यह संख्या सामान्य दिनों में 50 के आसपास रहती हैं। सड़कों पर फैला कूड़ा और गंदगी इस जहरीले वातावरण में और समस्या पैदा कर रही है।
दीपावली के बाद से ही वातावरण में धुंध, धुआं और धूल के बारीक कणों की समस्या बनी हुई है। इसको लेकर प्रदेश स्तर से निर्देश दिए गए हैं। जिसके बाद नगर निगम ने भी कुछ सक्रियता दिखाई, लेकिन इससे प्रभावित होने वाली संख्या लगातार बढ़ रही है। इस प्रदूषण का प्रभाव आंख, नाक, और कानों पर हो रहा है। जिला अस्पताल में ओपीडी में प्रतिदिन करीब 1800 से 2 हजार मरीज तक आते हैं। शनिवार को ईएनटी और नेत्र विभाग में ही 300 से अधिक मरीज पहुंचे।
स्कूली बच्चे नाक पर हाथ रखकर चल रहे
वातावरण में प्रदूषण के चलते स्कूली बच्चे तकलीफ में हैं। शहर में कई स्थानों पर देखा गया कि सड़कों पर वह मुंह पर हाथ रखकर चल रहे हैं। उन्हें स्कूल से घर ले जा रही महिलाएं भी मुंह पर कपड़ा बांध कर चल रही हैं। सड़कों पर टेंपो आदि से निकलने वाला काला धुआं समस्या में और भी इजाफा कर रहा है।
मास्क की बिक्री अचानक बढ़ी
शहर के मेडिकल स्टोरों पर अचानक मुंह पर लगाए जाने वाले मास्क की बिक्री बढ़ गई है। मेडिकल स्टोर संचालक अनिल कुमार गुप्ता कहते हैं कि 20 रुपये से लेकर 250 रुपये तक के साधारण मास्क उपलब्ध हैं। जहां तक गुणवत्ता की बात है तो इस समय माहौल ऐसा है कि मास्क नहीं होने से बेहतर है कि किसी भी प्रकार के मास्क का प्रयोग करना। कम से कम कुछ तो बचाव होता ही है।
वातावरण में छाई जहरीली धुंध आंखों के लिए बेहद हानिकारक है। जरूरी है कि इस समय आंखों को सादा साफ पानी से धोएं। घर से बाहर निकलते समय आंखों पर चश्मा लगाएं। तकलीफ होने पर आंखों को रगडें नहीं, बल्कि चिकित्सक से सलाह लें। इस मौसम के देखते हुए गांधी नेत्र चिकित्सालय में भी आंखों की तकलीफ से परेशान मरीजों की संख्या बढ़ी है।
- मधुप लहरी, चिकित्सालय अधीक्षक, गांधी नेत्र चिकित्सालय