मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी के सामने ही प्राइवेट एंबुलेंस के आसपास लोग खड़े हैं। पास में बैठे तीमारदारों से पूछा कि एंबुलेंस का ड्राइवर कहा हैं। एक व्यक्ति ने एक एंबुलेंस पर लिखे नंबर की ओर इशारा करके कहा, यह लिखा है मिला लें
(नंबर मिलाने के बाद बातचीत)
रिपोर्टर- 85 वर्षीय बुजुर्ग हैं, सांस उखड़ रही है। यहां (मेडिकल कॉलेज) में मना कर दिया है। प्राइवेट में ले जाना है। एंबुलेंस मिलेगी
एजेंट- अंदर एक काउंटर बना है। वहां चले जाएं, कोई मिल जाएगा
(फोन रखे हुए अभी दो मिनट भी नहीं हुए दो युवक उसी एंबुलेंस के पास आ गए)
एजेंट- आप ही ने फोन लगाया था क्या
रिपोर्टर- हां, 85 वर्षीय बुजुर्ग हैं। प्राइवेट में ले जाना है। यहां डॉक्टर कह रहे हैं घर ले जाएं
एजेंट - देखो भाईसाब, रामघाट रोड वाले में ले जाओगे तो कम से कम 25 हजार रुपये आईसीयू एक दिन का होगा। जांच का खर्चा अलग से। यहां ( केला नगर और धौर्रा के तीन चार आसपास के प्राइवेट हॉस्पिटल के नाम लिए ) हैं। किसी में भी चलो 5 से 7 हजार के बीच काम हो जाएगा। मरीज भी चंगा हो जाएगा।
रिपोर्टर- यहां पर कौन डॉक्टर देखेंगे।
एजेंट- मेडिकल के डॉक्टर हैं। जो यहां हैं वही वहां भी देखेंगे।
रिपोर्टर- इसका खर्चा अलग से होगा क्या
एजेंट- नहीं, 6 हजार रुपये एक दिन के हैं। डॉक्टर का खर्चा भी इसी में शामिल है। आपको बस दवाएं अलग से लेनी हैं।
रिपोर्टर- ठीक है हम परिवार के अन्य लोगों से बात कर लेते हैं।
(10 मिनट इमरजेंसी में अंदर वेटिंग रूम में बिताने के बाद बाहर आने पर वही दो एजेंट मिल जाते हैं)
एजेंट - हां तो भाईसाहब बताओ
रिपोर्टर- कोई छिपा हुआ खर्चा तो नहीं है पहले अपने वाले हॉस्पिटल से बात कर लो
(एजेंट रिपोर्टर के साथी के मोबाइल से हॉस्पिटल मैनेजर का नंबर लगाता है। कॉल रिसीव होने पर फोन एजेंट को थमा दिया गया।)
एजेंट (फोन पर) - बबलू बोल रहा हूं.
मैनेजर (फोन पर)- हां क्या केस है
एजेंट (फोन पर मैनेजर से)- इनका मरीज है। 6 हजार रुपये बताए हैं। एएमयू के डॉ. .... हैं, यही दखेंगे। बता दिया है।
(इसी तरह एजेंट ने एक और निजी हॉस्पिटल के मैनेजर से बात कराई, दोनों ही जगह कहा मरीज को ले आएं। एक जगह 5600 रुपये एक दिन का और एक जगह 6 हजार रुपये एक दिन का खर्चा बताया गया)