शहर के बुजुर्ग और हिंदू मुस्लिम समुदाय के लोगों ने पिछले पांच दशक में विभिन्न समय पर हुए सांप्रदायिक दंगों की घटनाओं को बयां किया और सबसे अधिक जरूरत शांति और संयम की बताई। अमर उजाला द्वारा सराय हकीम में मंगलवार को दोनों समुदायों के लोगों के साथ संवाद किया गया। इसमें बुजुर्गों ने पांच दशकों में अब तक हुई घटनाओं के संबंध में बताया। साथ ही कहा शांति बड़ी चीज है।
रघुवीर पुरी निवासी बुजुर्ग इंद्र मोहन शर्मा कहते हैं कि उन्होंने सन् 1971, 1977, 1980, 1990,1992 और 2007 का दंगा देखा है। यह अच्छी बात है कि पिछले दस वर्ष से भी अधिक समय से कोई ऐसी घटना अब नहीं हुई है। अब जरूरत इसी तरह के जज्बे को बनाए रखने की है।
जमालपुर निवासी कुंवर कय्यूम अली कहते हैं कि किसी भी समाज में आपस में टकराव होना स्वाभाविक बात है, लेकिन इसके बाद सामंजस्य और सौहार्द भी बने रहना चाहिए। शहर के लोगों को समझदारी से काम लेना होगा। जयगंज में काजीपाड़ा निवासी मशहूर शायर बाबर इलियास कहते हैं कि नफरतों से भला क्या हासिल हुआ है? शहर की पेशानी से दंगे का दाग बड़ी मुश्किल से हल्का हुआ है। लोगों की जिम्मेदारी है कि यह फिर से गहरा न हो जाए। सराय लबरिया निवासी मुन्ना भाई, लक्ष्मी पुरी निवासी अजय राजौरिया, सराय रहमान निवासी इरशाद, अशोक नगर निवासी विनोद पांडेय कहते हैं कि शहर के माहौल को सामान्य रखने की जिम्मेदारी सभी की है, क्योंकि माहौल खराब होने का नुकसान सभी को है। यह शहर सभी का है।
80 के दंगे ने कर दिया था सेंटर प्वाइंट आबाद
संवाद में आए सुरेंद्र नगर के रहने वाले बुजुर्ग महेंद्र पहलवान कहते हैं कि सन् 1980 में जब दंगा नियंत्रण करने में प्रशासन को परेशानी हो रही थी तो आगरा से तेज तर्रार आईपीएस अधिकारी बीपी सिंह को आगरा से अलीगढ़ बुलाया गया था। उस समय लंबे समय तक कर्फ्यू लगा रहा। पुराने शहर में लोग घरों में कैद होकर रह गए और रोजमर्रा की जरूरत की चीजों को लेकर परेशानी होने लगी। उस समय सेंटर प्वाइंट (उस समय यह नाम नहीं था। टीकाराम मंदिर के पास कहकर लोग संबोधित करते थे) पर कुछ दुकानें प्रोविजन स्टोर, मेडिकल स्टोर आदि की थीं। यहां शहर के लोग खरीदारी करने के लिए आते थे। कहा जाता है कि यहीं से सेंटर प्वाइंट पर रौनक बढ़ने लगी।
उपरकोट पर जो हुआ अचानक हुआ : इरफान
शहर मुफ्ती मोहम्मद खालिद हमीद के भाई मौलाना इरफान हमीद ने कहा कि ऊपरकोट पर बवाल के बाबत पहले से योजना होने की बात जो खुफिया रिपोर्ट में कही गई है, उससे वह इत्तेफाक नहीं रखते हैं। अलबत्ता, ऊपरकोट पर जो हुआ वह अचानक हुआ है। ऊपरकोट पर जो भीड़ उमड़ी थी, उसमें आसपास सटे लोग शामिल थे। इसका कतई मतलब यह नहीं निकाला जाना चाहिए कि पहले से यह योजना थी। खुद संभ्रांत लोग जुटी भीड़ को समझाने में लगे रहे।
हिंसा में घायलों के प्रति मेरी संवेदना: विवेक बंसल
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के राष्ट्रीय सचिव विवेक बंसल ने शहर में हुए बवाल और हिंसा की घटना में घायल लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की है और उनके जल्द से जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना की है। उन्होंने कहा कि इस समय शहर के लोगों को बेहद समझदारी और संयम से काम लेने की जरूरत है। क्योंकि यह शहर उनका ही है और उनको ही रहना है। शहर की स्थिति खराब होने का नुकसान सभी को होगा।