यह पहला मौका नहीं है जब एएमयू छात्रों ने स्टेशन पहुंचकर कई घंटे हंगामा किया हो। पहले भी स्टेशन पर इसी तरह की घटनाएं हुईं। हालांकि कोरोना संक्रमण के चलते दो साल तक कैंपस बंद रहने के कारण तीन साल में यह पहला मौका है जब एएमयू छात्रों ने स्टेशन पहुंचकर हंगामा काटा है। 16 सितंबर 2019 को स्टेशन पर एएमयू छात्राओं और उनके परिजनों से अभद्रता को लेकर छात्रों का आक्रोश भड़क उठा था। कई घंटे तक हंगामे और कार्रवाई के बाद ही गुस्सा थमा । इससे पहले 27 सितंबर 2017 को एएमयू छात्रों ने स्टेशन पर तोड़फोड़ करते हुए हंगामा काटा था। तीन मई 2011 को एएमयू को अनिश्चित काल तक बंद किए जाने पर कई ट्रेनों को स्टेशन पहुंचकर कब्जा लिया था। ट्रेन व स्टेशन पर भी तोड़फोड़ की गई थी। इसके बाद प्रशासन की सख्ती के चलते स्टेशन शांत रहा। बृहस्पतिवार को एएमयू छात्रों के हंगामे के बाद स्टेशन पर हुई पुरानी घटनाओं की यादें ताजा हो गईं।
प्रॉक्टेरियल टीम ने दिखाई संजीदगी, छात्रों का आक्रोश किया शांत
देर रात में एएमयू छात्रों के साथ स्टेशन पर मारपीट की खबर अमुवि परिसर में पहुंची तो सैकड़ों छात्र स्टेशन पर पहुंच गए । करीब घंटे भर बाद प्रॉक्टोरियल टीम भी प्रॉक्टर प्रो. वसीम अली के नेतृत्व में आ पहुंची। आरपीएफ कर्मियों के मारपीट करने से छात्र इतने आक्रोशित हो गए कि वे हंगामा करते हुए दोषी कर्मियों को घटना स्थल पर बुलाने की मांग करने लगे। स्टेशन के अलावा एएमयू कैंपस में भी छात्र कार्रवाई की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए। किसी तरह प्रॉक्टेरियल टीम ने संजीदगी दिखाते हुए पहले गुस्साए छात्रों को शांत कराया। बाद में रेलवे अफसरों से वार्ता कर दोषी आरपीएफ कर्मियों पर कार्रवाई कराई। रात भर चले हंगामे के बाद सुबह करीब साढ़े आठ बजे मामला शांत हो सका।
स्टेशन पर मौजूद रहेंगे अधिकारी
स्टेशन पर छात्रों संग हुई मारपीट की घटना के बाद एएमयू इंतजामिया ने स्टेशन पर बने प्रोक्टोरियल कार्यालय पर छात्र-छात्राओं की मदद के लिए कार्यालय का यथावत संचालन कराने का निर्णय लिया है। प्रॉक्टर वसीम अली के अनुसार कार्यालय में 24 घंटे शिफ्ट वाइज अधिकारियों की तैनाती होगी, जो मौजूद रहकर रेलवे से जुड़ी छात्रों की समस्याएं हल कराएंगे।
प्लेटफार्म टिकट जरूरी
रेलवे स्टेशन पर आने वालों को प्लेटफार्म टिकट लेना अनिवार्य है। रेलवे अफसरों के अनुसार यदि चेकिंग के दौरान कोई भी व्यक्ति बिना प्लेटफार्म या रेल टिकट के पाया जाता है तो उसे बिना टिकट माना जाएगा। इसके लिए उससे बतौर जुर्माना 250 रुपये और 50 रुपये टैक्स पैनल्टी के रूप में अथवा प्लेटफार्म पर उस वक्त खड़ी ट्रेन के चलने वाले स्थान से लेकर स्टेशन आने तक का किराया मानते हुए जुर्माने के रूप में लिया जाएगा।