गभाना आने से पहले नवीन दिल्ली में भी किराये पर रहता था। वहां अपनी मां व पत्नी बच्चों संग रहता था। करीब 35 वर्षीय नवीन बाद में दिल्ली छोड़कर वापस गभाना आकर बस गया। यहां परचून की दुकान खोल ली। मगर उसके दिल्ली के संपर्कों के जरिये ही उसे इस धंधे में जोड़ा गया। उसने चाइल्ड पोर्नोग्राफी बेचने वाले साइबर गैंग को अपनी जी-मेल आईडी से ही वीडियो व फोटो भेज दिए। उस आईडी में उसके दो मोबाइल नंबर भी जुड़े हुए थे। बस उसे इस बात का अंदाजा न था कि कभी वह इसी मेल के जरिये पकड़ा जाएगा। जब इंटरपोल के इनपुट पर सीबीआई ने काम शुरू किया तो काफी समय तो उसकी मेल आईडी के आधार पर उस तक पहुंचने में लगा। मगर जब टीम उसके घर पहुंची तो उसके पास से मेल के अलावा कार्ड में काफी आपत्तिजनक सामान मिला। जो बड़ा साक्ष्य बना। जब से वह जेल गया। तब से उसे जमानत नहीं मिल सकी। अब उसे सजा सुनाई गई।
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फॉरेंसिक जांच के बाद कोर्ट में साक्ष्य किए गए पेश
सीबीआई ने जो भी साक्ष्य संकलित किए। उन सभी की फॉरेंसिक जांच कराई। पीड़ित बच्ची से जुड़े वीडियो में उसका एक हाथ साफ साफ दिख रहा था। उसकी फॉरेंकिस जांच में पुष्टि हुई। साथ में बच्ची ने भी उस हाथ को नवीन के हाथ के रूप में पहचाना। ये सभी साक्ष्य कोर्ट में पेश किए गए।
नवीन को नहीं मिला प्राइवेट वकील
नवीन के मामले में सबसे खास बात ये रही कि उसे कोई प्राइवेट वकील नहीं मिला। उसके परिवार से कोई नहीं आता था। दूसरा प्राइवेट वकील भी दुष्कर्म व देश विरोधी गतिविधियों के चलते सीबीआई से जुड़ा प्रकरण होने के चलते हाथ खींच लेते थे। बाद में उसने विधिक सेवा प्राधिकरण में अपील की। वहां से उसे लीगल एड सर्विस के तहत वकील इंद्रजीत सिंह चड्ढा मिले। तब उसके पक्ष में अदालत में बहस भी की गई।
इस मामले में सीबीआई ने पहचान होने पर 12 अगस्त 2024 को अपने यहां मुकदमा दर्ज किया। फिर टीम ने उसके घर आकर साक्ष्य संकलित किए। मामले में 4 सितंबर को बच्ची के बाल कल्याण समिति में बयान कराए गए। 5 सितंबर को मेडिकल प्रक्रिया करानी थी। मगर बच्ची का परिवार सहमत नहीं हुआ। 6 सितंबर को जेल भेजा गया। बाद में चार्जशीट पर 13 नवंबर को कोर्ट ने संज्ञान लिया, जबकि 21 फरवरी को आरोप तय कर ट्रायल शुरू हुआ। गवाही के बाद 6 मार्च को सफाई पेश करने का अवसर दिया गया। एक बचाव में गवाह पेश किया। मगर वह साबित नहीं कर सका।
कोर्ट की टिप्पणी: यह शोषण मानवता-समाज के विरुद्ध अपराध
कोर्ट ने निर्णय सुनाते हुए टिप्पणी की है कि इस मामले में दुष्कर्म व अश्लील प्रयोजन से पीड़ित के फोटो खींचे गए। उसका भंडारण किया गया। बालकों का इलेक्ट्रिक चित्रण बनाया गया। बच्चे हमारे देश के अनमोल मानव संसाधन हैं, देश का भविष्य हैं। मगर दुर्भाग्य से हमारे देश में बालिकाएं बहुत कमजोर स्थिति में हैं। उनके शोषण के कई तरीके हैं, जिनमें शारीरिक शोषण व दुव्र्यवहार शामिल है। बच्चों का इस तरह का शोषण मानवता-समाज के विरुद्ध अपराध है। इसलिए बच्चों व विशेषकर महिलाओं को पूर्ण सुरक्षा व देखभाल व संरक्षण की आवश्यकता है।
चार्जशीट के अनुसार बाल कल्याण समिति के समक्ष पीड़ित ने बयान दिए थे कि आरोपी नवीन की परचून की दुकान है। वह आरोपी की दुकान पर सामान लेने जाती थी। तभी उसकी मां उससे दूध मंगा लेती थी। घटना वाले दिन भी वह दूध लेकर आई। तब उसके घर के अंदर गई। दूध रखते ही आरोपी ने उसे पहले कपड़े उतारने के लिए तीन बार लालच दिया। जब वह नहीं मानी तो जबरन कपड़े उतारे। फिर उसके साथ अलग-अलग तरह से गंदी हरकतें की। साथ में उसके वीडियो फोटो भी बनाए। एक वीडियो बच्ची को दिखाया, जिसमें उसने स्वीकारा कि जो पुरुष का हाथ दिखाई दे रहा है। वह आरोपी का ही है। यही बयान सजा का आधार बना है।
ये 9 गवाह किए गए पेश
इस मुकदमे में कुल 9 गवाह पेश किए गए। जिसमें बैंक ऑफ बड़ौदा के प्रबंधक सैय्यद एम, सहायक प्रबंधक अंकित कुमार, बाल कल्याण समिति सदस्य मंजू गुप्ता, पीड़ित बच्ची, इलाके के गवाह संजू, विमलेश, अमित, राजेश यादव के अलावा विवेचक सीबीआई एसएचओ परवेश कुमार शामिल रहे।