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घिनौनी हरकत: नवीन ने चाइल्ड पोर्नोग्राफी गैंग संग मिलकर परोसी गरीब बच्चों संग अश्लीलता, नहीं मिला निजी वकील

Tue, 27 May 2025 07:47 AM IST
चमन शर्मा अभिषेक शर्मा, अमर उजाला, अलीगढ़

सार

चाइल्ड पोर्नोग्राफी बेचने वाले साइबर गैंग से जुड़ा गभाना का नवीन सीबीआई द्वारा कई माह की जांच पड़ताल के बाद पकड़ा गया था। उसके ई-मेल व कार्ड से अन्य कई बच्चों के फोटो वीडियो भी मिले थे।
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दोषी नवीन कुमार - फोटो : संवाद
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विस्तार
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साइबर अपराध के क्षेत्र में सिर दर्द बने डार्कवेब पर तीन वर्ष पहले चाइल्ड पोर्नोग्राफी के इनपुट इंटरपोल ने दिए थे। जिसमें साफ कहा था कि भारत के आसानी से लालच में फंसने वाले गरीब व कमजोर वर्ग के बच्चों संग अश्लीलता के वीडियो-फोटो डार्कवेब के जरिये दुनिया भर में परोसे जा रहे हैं। तब सीबीआई ने देश भर में क्रमवार कार्रवाई की। इसी कड़ी में इस चाइल्ड पोर्नोग्राफी बेचने वाले साइबर गैंग से जुड़ा गभाना का नवीन सीबीआई द्वारा कई माह की जांच पड़ताल के बाद पकड़ा गया था। हालांकि उसके ई-मेल व कार्ड से अन्य कई बच्चों के फोटो वीडियो भी मिले थे। मगर उनकी पहचान न हो सकी। सिर्फ एक बच्ची की पहचान पर उसे कार्रवाई का आधार बनाया गया था।

चूंकि सीबीआई की पॉक्सो कोर्ट नहीं है। इसलिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मुकदमे का ट्रायल पीड़ित के गृह जनपद के न्यायालय में हुआ। इस मामले में बच्ची के बयान व इलेक्ट्रिक साक्ष्यों के आधार पर दोषी नवीन को पॉक्सो सहित दुष्कर्म व आईटी की धारा में सजा सुनाई गई है। उनके साथ सीबीआई के अधिवक्ता ने भी आरोपी के खिलाफ अदालत में दलील दी।-ललित सिंह पुंढीर, एडीजीसी

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गरीब बच्चों को लालच देकर करते थे गंदी हरकत
इस मामले में जब नवीन व पीड़ित बच्ची से पूछताछ हुई, तब उजागर हुआ था कि यह गिरोह ऐसे गरीब बच्चों को निशाना बनाता था। जो आसानी से उनके लालच में फंस जाएं। नवीन भी कुछ इसी तरह की हरकत करता था। उसने खुद इस पीड़ित बच्ची को पहले खाने पीने की वस्तु देने का लालच दिया। फिर उसे अन्य उपहार देने का लालच दिया। मगर यह बच्ची उसके किसी लालच में नहीं आई तो उसके जबरन कपड़े उतारे गए थे। फिर फोटो औैर वीडियो बनाकर डार्कवेब गिरोह को भेजे गए। जो बाद में दुनिया भर में देखे गए। उसके पास मिले मेल व कार्ड में करीब एक दर्जन अन्य बच्चों के भी वीडियो फोटो मिले थे। मगर उनकी पहचान नहीं हो सकी थी।

अपनी आईडी से वीडियो-फोटो भेजने पर फंसा

गभाना आने से पहले नवीन दिल्ली में भी किराये पर रहता था। वहां अपनी मां व पत्नी बच्चों संग रहता था। करीब 35 वर्षीय नवीन बाद में दिल्ली छोड़कर वापस गभाना आकर बस गया। यहां परचून की दुकान खोल ली। मगर उसके दिल्ली के संपर्कों के जरिये ही उसे इस धंधे में जोड़ा गया। उसने चाइल्ड पोर्नोग्राफी बेचने वाले साइबर गैंग को अपनी जी-मेल आईडी से ही वीडियो व फोटो भेज दिए। उस आईडी में उसके दो मोबाइल नंबर भी जुड़े हुए थे। बस उसे इस बात का अंदाजा न था कि कभी वह इसी मेल के जरिये पकड़ा जाएगा। जब इंटरपोल के इनपुट पर सीबीआई ने काम शुरू किया तो काफी समय तो उसकी मेल आईडी के आधार पर उस तक पहुंचने में लगा। मगर जब टीम उसके घर पहुंची तो उसके पास से मेल के अलावा कार्ड में काफी आपत्तिजनक सामान मिला। जो बड़ा साक्ष्य बना। जब से वह जेल गया। तब से उसे जमानत नहीं मिल सकी। अब उसे सजा सुनाई गई।
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फॉरेंसिक जांच के बाद कोर्ट में साक्ष्य किए गए पेश
सीबीआई ने जो भी साक्ष्य संकलित किए। उन सभी की फॉरेंसिक जांच कराई। पीड़ित बच्ची से जुड़े वीडियो में उसका एक हाथ साफ साफ दिख रहा था। उसकी फॉरेंकिस जांच में पुष्टि हुई। साथ में बच्ची ने भी उस हाथ को नवीन के हाथ के रूप में पहचाना। ये सभी साक्ष्य कोर्ट में पेश किए गए।

नवीन को नहीं मिला प्राइवेट वकील
नवीन के मामले में सबसे खास बात ये रही कि उसे कोई प्राइवेट वकील नहीं मिला। उसके परिवार से कोई नहीं आता था। दूसरा प्राइवेट वकील भी दुष्कर्म व देश विरोधी गतिविधियों के चलते सीबीआई से जुड़ा प्रकरण होने के चलते हाथ खींच लेते थे। बाद में उसने विधिक सेवा प्राधिकरण में अपील की। वहां से उसे लीगल एड सर्विस के तहत वकील इंद्रजीत सिंह चड्ढा मिले। तब उसके पक्ष में अदालत में बहस भी की गई।

क्रमवार इस तरह हुई पूरी कार्रवाई

इस मामले में सीबीआई ने पहचान होने पर 12 अगस्त 2024 को अपने यहां मुकदमा दर्ज किया। फिर टीम ने उसके घर आकर साक्ष्य संकलित किए। मामले में 4 सितंबर को बच्ची के बाल कल्याण समिति में बयान कराए गए। 5 सितंबर को मेडिकल प्रक्रिया करानी थी। मगर बच्ची का परिवार सहमत नहीं हुआ। 6 सितंबर को जेल भेजा गया। बाद में चार्जशीट पर 13 नवंबर को कोर्ट ने संज्ञान लिया, जबकि 21 फरवरी को आरोप तय कर ट्रायल शुरू हुआ। गवाही के बाद 6 मार्च को सफाई पेश करने का अवसर दिया गया। एक बचाव में गवाह पेश किया। मगर वह साबित नहीं कर सका।

कोर्ट की टिप्पणी: यह शोषण मानवता-समाज के विरुद्ध अपराध
कोर्ट ने निर्णय सुनाते हुए टिप्पणी की है कि इस मामले में दुष्कर्म व अश्लील प्रयोजन से पीड़ित के फोटो खींचे गए। उसका भंडारण किया गया। बालकों का इलेक्ट्रिक चित्रण बनाया गया। बच्चे हमारे देश के अनमोल मानव संसाधन हैं, देश का भविष्य हैं। मगर दुर्भाग्य से हमारे देश में बालिकाएं बहुत कमजोर स्थिति में हैं। उनके शोषण के कई तरीके हैं, जिनमें शारीरिक शोषण व दुव्र्यवहार शामिल है। बच्चों का इस तरह का शोषण मानवता-समाज के विरुद्ध अपराध है। इसलिए बच्चों व विशेषकर महिलाओं को पूर्ण सुरक्षा व देखभाल व संरक्षण की आवश्यकता है।
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पीड़ित ने ये दिए थे बयान

चार्जशीट के अनुसार बाल कल्याण समिति के समक्ष पीड़ित ने बयान दिए थे कि आरोपी नवीन की परचून की दुकान है। वह आरोपी की दुकान पर सामान लेने जाती थी। तभी उसकी मां उससे दूध मंगा लेती थी। घटना वाले दिन भी वह दूध लेकर आई। तब उसके घर के अंदर गई। दूध रखते ही आरोपी ने उसे पहले कपड़े उतारने के लिए तीन बार लालच दिया। जब वह नहीं मानी तो जबरन कपड़े उतारे। फिर उसके साथ अलग-अलग तरह से गंदी हरकतें की। साथ में उसके वीडियो फोटो भी बनाए। एक वीडियो बच्ची को दिखाया, जिसमें उसने स्वीकारा कि जो पुरुष का हाथ दिखाई दे रहा है। वह आरोपी का ही है। यही बयान सजा का आधार बना है।

ये 9 गवाह किए गए पेश
इस मुकदमे में कुल 9 गवाह पेश किए गए। जिसमें बैंक ऑफ बड़ौदा के प्रबंधक सैय्यद एम, सहायक प्रबंधक अंकित कुमार, बाल कल्याण समिति सदस्य मंजू गुप्ता, पीड़ित बच्ची, इलाके के गवाह संजू, विमलेश, अमित, राजेश यादव के अलावा विवेचक सीबीआई एसएचओ परवेश कुमार शामिल रहे।
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