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दो बहुचर्चित मामलों में आरोपी बरी: एक में कहानी कमजोर, दूसरी में गवाह मुकरे

Sat, 31 May 2025 03:10 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

मडराक और गोंडा के दो मामलों पर फैसला आ गया हैे। दोनों में ही आरोपी बरी हो गए। एक में पुलिस और दूसरे में गवाहों की कमी का फायदा आरोपी को मिला। 
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कोर्ट - फोटो : प्रतीकात्मक
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विस्तार
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अदालतों में पुराने मुकदमे निस्तारण के क्रम में अलीगढ़ जिले के दो बहुचर्चित मामलों में निर्णय सुनाया गया है। जिनमें मडराक के एक बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड में पुलिस की कमजोर कहानी के आधार पर आरोपी बरी हुए हैं, जबकि गोंडा के बालक के अपहरण मामले में गवाहों के पक्षद्रोही होने के चलते आरोपी बरी किए गए हैं।

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मडराक से संबंधित प्रकरण वर्ष 2014 का है। गांव समस्तपुर कीरत के धर्मपाल ने 15 सितंबर 2014 को तहरीर देते हुए मुकदमा दर्ज कराया कि उनके बेटे गजेंद्र के पास पड़ोसी गांव मईनाथ के विश्वजीत का फोन आया था कि वह अपने साथी वीरू को लेकर आ जाए। उनका जो झगड़ा हुआ था। उसमें बातचीत कर सुलह करा दी जाएगी। इस पर गजेंद्र वीरू को लेकर उनके पास गया। फिर उन्हें लोगों ने नामजदों संग रास्ते में खड़ा देखा। बाद में उन्हें आरोपी अपनी गाडिय़ों में डालकर ले गए। इसके बाद से दोनों गायब हो गए। पिता ने अपहरण व हत्या का अंदेशा लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस विवेचना में विश्वजीत सहित 11 लोगों पर चार्जशीट दायर की। साथ में कुछ दिन बाद अकराबाद की नहर में सिर विहीन लाश मिली, जिसकी पहचान वीरू के रूप में हुई। मगर गजेंद्र की लाश नहीं मिली। 

पुलिस चार्जशीट में दोनों की हरदुआगंज क्षेत्र में कुल्हाड़ी से हत्या कर शव नहर में बहाना व कपड़ों में आग लगाने का आरोप लगाया। मुकदमे में न्यायालय में ट्रायल में न तो पुलिस की कहानी आरोप साबित कर सकी। न शव की पहचान साबित हो सकी। न बरामदगी साबित हो सकी। अदालत ने पुलिस की कहानी पर आश्चर्य जताते हुए संदेह के आधार पर सभी आरोपियों को बरी कर दिया। बता दें कि यह दोहरा हत्याकांड काफी सुर्खियों में रहा था।

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दूसरा मामला गोंडा के गांव भोज नगरिया का 10 जून 2009 का है। जिसमें मुकदमा दिनेश की ओर से कराते हुए कहा गया कि उनका भांजा शिवम निवासी गोरई उसके घर यानि अपनी ननिहाल आया हुआ था। तभी घटना वाले दिन कुछ आरोपी उसे बाइक से अगवा कर ले गए। जिसमें वादी के रिश्तेदार आकाश द्वारा फिरौती के लिए अपहरण कराए जाने का आरोप लगाकर मुकदमा दर्ज कराया। मामले में बच्चे की तलाश में लगी पुलिस ने अगले दिन यानि 11 जून को टेंटीगांव रोड की नहर पर बाइक सवारों से मुठभेड़ कर बच्चे को मुक्त कराया। 

मुठभेड़ में कई थानों की पुलिस, एसओजी व सीओ आदि शामिल रहे। मुठभेड़ में तीन बदमाश पकड़े गए। मामले में मांट मथुरा के विजय, जमुनापार मथुरा के राजेश, खेडिय़ा बहादुरगढ़ी रामघाट रोड अलीगढ़ के प्रवीन के खिलाफ चार्जशीट दायर की गई। इस मामले में पुलिस ने जो कहानी गढ़ी उस कहानी को न्यायालय में ट्रायल में खुद बच्चे व उसके परिवार ने यह कहकर नकार दिया कि उन्होंने आरोपी नहीं पहचाने। इस आधार पर अदालत ने गवाहों को पक्षद्रोही साबित कर सभी को बरी कर दिया।
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