दूसरा मामला गोंडा के गांव भोज नगरिया का 10 जून 2009 का है। जिसमें मुकदमा दिनेश की ओर से कराते हुए कहा गया कि उनका भांजा शिवम निवासी गोरई उसके घर यानि अपनी ननिहाल आया हुआ था। तभी घटना वाले दिन कुछ आरोपी उसे बाइक से अगवा कर ले गए। जिसमें वादी के रिश्तेदार आकाश द्वारा फिरौती के लिए अपहरण कराए जाने का आरोप लगाकर मुकदमा दर्ज कराया। मामले में बच्चे की तलाश में लगी पुलिस ने अगले दिन यानि 11 जून को टेंटीगांव रोड की नहर पर बाइक सवारों से मुठभेड़ कर बच्चे को मुक्त कराया।
मुठभेड़ में कई थानों की पुलिस, एसओजी व सीओ आदि शामिल रहे। मुठभेड़ में तीन बदमाश पकड़े गए। मामले में मांट मथुरा के विजय, जमुनापार मथुरा के राजेश, खेडिय़ा बहादुरगढ़ी रामघाट रोड अलीगढ़ के प्रवीन के खिलाफ चार्जशीट दायर की गई। इस मामले में पुलिस ने जो कहानी गढ़ी उस कहानी को न्यायालय में ट्रायल में खुद बच्चे व उसके परिवार ने यह कहकर नकार दिया कि उन्होंने आरोपी नहीं पहचाने। इस आधार पर अदालत ने गवाहों को पक्षद्रोही साबित कर सभी को बरी कर दिया।