शहर में बढ़ रहे आवारा कुत्तों के आतंक और इनकी बढ़ रही संख्या को देखते हुए नगर निगम ने अब कुत्तों की नसबंदी कराने की योजना बनाई है। जिससे इनकी संख्या काबू में हो सकेगी। इसके लिए दिल्ली की एक फर्म को कार्य सौंपने की योजना है। एक अनुमान के मुताबिक जिले में प्रतिदिन सरकारी अस्पतालों, ग्रामीण क्षेत्र की सीएचसी में आने वाले केसों की संख्या करीब 1200 से 1500 के बीच है। इसमें अगर निजी क्लीनिक और नर्सिंग होम में आने वाले केसों की संख्या जोड़ दी जाए तो आंकड़े और भी चौंकाने वाले होंगे।
मलखान सिंह जिला अस्पताल के वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ. यशपाल रावल कहते हैं कि कुत्ता काटने के बाद बेहद गंभीर समस्या आती हैं। अगर रैबीज हो जाए तो मरीज की मौत तक निश्चित है। यह भी देखा गया है कि दो पहिया वाहन चालकों के पीछे कुत्ते दौड़ते हैं। जिला अस्पताल में एक दिन में ओपीडी में 125 से 140 लोग एंटी रैबीज इंजेक्शन के लिए आते हैं।
गांव के कुत्ते ने काटा तो शहर के अस्पताल में इलाज नहीं
अलीगढ़। मलखान सिंह जिला अस्पताल में क्वार्सी और सिविल लाइन के कुत्ता काटने के केसों में एंटी रैबीज इंजेक्शन नहीं लगाए जा रहे हैं। इसके अलावा ग्रामीण इलाकों के मामलों में भी मलखान सिंह अस्पताल में एंटी रैबीज इंजेक्शन नहीं लगाए जा रहे हैं। इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी स्तर से भी निर्देश जारी कर दिए गए हैं। साथ ही जो भी मरीज एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाने आ रहा है, उससे आईडी प्रूफ मांगा जा रहा है, जिससे तय किया जा सके कि वह ग्रामीण क्षेत्र का नहीं है।