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कोरोना: एंटीजन जांच में संक्रमित व्यक्ति को थमा दी नेगेटिव आने की रिपोर्ट

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कोरोना वायरस। - फोटो : CITY OFFICE
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कोरोना काल में स्वास्थ्य विभाग लोगों की जान बचाने के बजाय सामुदायिक संक्रमण के प्रसार का कारण बनने में लगा है। बृहस्पतिवार को एक ऐसे ही कारनामे का खुलासा हुआ। जिला अस्पताल के एक लैब टेक्नीशियन ने आठ अगस्त को चामुंडा मंदिर, घुड़ियाबाग निवासी एक व्यक्ति की एंटीजन जांच की। जांच में वह संक्रमित पाया गया। मगर, संक्रमित को लैब टेक्नीशियन पीके यादव ने नेगेटिव आने की जांच रिपोर्ट हाथ से लिखकर दे दी, जबकि रजिस्टर और डीएसओ पोर्टल पर संक्रमित होने की फीडिंग की गई।
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मरीज को जब आईसोलेट करने के लिए कोरोना कंट्रोल रूम से फोन किया गया, तो व्यक्ति ने बताया कि वह तो नेगेटिव है और खुद को आईसोलेट नहीं करेगा। जिलाधिकारी ने मामले में लैब टेक्नीशियन पीके यादव की संविदा समाप्ति का आदेश दिया है। साथ ही जिला अस्पताल के सीएमएस को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
जिलाधिकारी चंद्रभूषण सिंह ने बताया कि पूरे प्रकरण में साफ तौर पर लापरवाही की बात सामने आ रही है। यह बिल्कुल भी सहन नहीं की जाएगी। संक्रमित व्यक्ति को भी बताया गया है कि वह खुद को होम या कोविड अस्पताल में आईसोलेट करे। अगर, वह ऐसा नहीं करता है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
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क्यों दी नेगेटिव रिपोर्ट, क्या डीडीयू के संविदा कर्मियों की तरह ली गई रिश्वत
संक्रमित मरीजों की रिपोर्ट के साथ छेड़खानी का पहला मामला नहीं है। इससे पहले दीनदयाल अस्पताल में भी एक ऐसा ही प्रकरण बीते माह में सामने आया था। उसमें भी एक मरीज का नाम और पता संविदा कर्मी द्वारा छिपा लिया गया था। मरीज को तलाशने में जिला प्रशासन के पसीने छूट गए। मामला जब पकड़ में आया तो प्रशासन ने कार्रवाई की। इसमें पैसों के लेनदेन की बात सामने आई थी। इस बार भी ऐसा ही हुआ है। एक मरीज को कैसे नेगेटिव रिपोर्ट हाथ से लिखकर दे दी गई। क्या इसमें भी पैसों का लेनदेन हुआ। इन सभी सवालों के जवाब तलाशने के लिए जिला प्रशासन गोपनीय तौर पर जांच भी कर रहा है।
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