अलीगढ़। आजादी के बाद के लोकसभा चुनावों में अलीगढ़ के मतदाता ने जो उत्साह दिखाया था दस तारीख को उसी उत्साह की जरूरत है। यदि ऐसा नहीं किया तो आप-हम पर लगा ‘उदासीन मतदाता’ का दाग नहीं धुल पाएगा। स्कूल-कॉलेजों की अंकतालिका में भले ही हम टॉप करते आ रहे हैं, लोकतंत्र की परीक्षा में खींचतान कर पास ही हो पा रहे हैं। लोकसभा की वोटिंग में ‘मेरिट’ में आना तो दूर 36 साल से फर्स्ट डिवीजन तक नहीं आई है।
यह बात थोड़ा चौंकाती भी है और एक सवाल भी खड़ा करती है। जिस दौर में मतदान के लिए बूथ तक जाने को साधन नहीं हुआ करते थे। वोटर की सुरक्षा भी दांव पर लगी होती थी उस दौर में खूब वोट पड़ा। देश के आजाद होने के बाद 1951 में पहले लोकसभा चुनाव हुए थे। इसमें 48.23 फीसदी मतदान हुआ था। इसके बाद तो मतदान का प्रतिशत लगातार बढ़ता गया। 1977 के लोकसभा चुनाव में रिकॉर्ड 64.79 फीसदी मतदान हुआ।
अलीगढ़ लोकसभा क्षेत्र के चुनाव इतिहास में 26 साल बाद सर्वाधिक बने वोटिंग के इस रिकार्ड को 36 साल में नहीं तोड़ा जा सका है। 1977 के बाद मतदान प्रतिशत का ग्राफ इतनी तेजी से गिरा कि 1996 में केवल 40.67 फीसदी लोग ही अपने मताधिकार का प्रयोग करने बूथ तक पहुंचे। पिछले लोकसभा चुनाव में भी मतदान केवल 51.48 फीसदी रहा था।