अलीगढ़। डीएस कॉलेज की छात्रा नीलम ने बताया कि कहना है कि बीएएलएलबी सेकेंड ईयर का रिजल्ट अभी तक घोषित नहीं की गई। थर्ड ईयर की कक्षाएं भी पूरी हो गईं। समझ में नहीं आता कि क्या करूं। आगरा यूनिवर्सिटी की लापरवाही से कैरियर बर्बाद होने की आशंका हैं। यहां पर वक्त की कीमत का अहसास किसी को नहीं हैं।
यह दर्द अकेले नीलम का नहीं बल्कि डॉ. बीआर अंबेडकर यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले डीएस, एसवी, टीकाराम कॉलेज समेत जनपद के सभी राजकीय एवं निजी शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ने वाले 50 हजार से अधिक छात्र-छात्राओं का है। आज यूनिवर्सिटी में पढ़ाई का मतलब ‘एडमिशन लो, देर-सवेर परीक्षा दो और रिजल्ट का इंतजार करो’ रह गया हैं। कक्षाओं के नाम पर कॉलेजों में खानापूर्ति होती हैं। बिना पाठ्यक्रम पूरा किए परीक्षाएं संपन्न करा ली जाती हैं। रिजल्ट घोषित होने के बाद विद्यार्थी अंकपत्र का इंतजार करते हैं। स्नातक, स्नातकोत्तर, बीबीए, बीसीए जैसे विभागों एवं पाठ्यक्रमों का हाल एक समान हैं।
इतना ही नहीं डीएस और एसवी कॉलेजों के छात्रावास वर्षों से बंद हैं। प्राइवेट कॉलेजों में मनमानी वसूली की शिकायत आती हैं। कोई देखने या सुनने वाला नहीं हैं। रिसर्च स्कॉलर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. राहुल कहते है कि उच्च शिक्षा पर किसी का ध्यान नहीं। 2009 के बाद प्रदेश में पीएचडी में पंजीयन बंद हैं। पीएचडी एवं एमफिल कर चुके छात्र रोजगार के लिए भटक रहे हैं। लोकसभा चुनाव पर हजारों छात्र-छात्राओं की आशा भरी निगाह हैं।
उन्हें उम्मीद है कि कई जनपद में फैले आगरा यूनिवर्सिटी क्षेत्र से ऐसे नेता जीतकर संसद में जाएंगे, जो उच्च शिक्षा की बदहाली को दूर कराएंगे और यहां के युवाओं के कैरियर को बर्बाद होने से बचाएंगे।
डीएस कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन के सचिव डॉ. मुकेश भारद्वाज भी कहते है कि उच्च शिक्षा दयनीय स्थिति में हैं। कॉलेजों में 40 प्रतिशत से अधिक पद खाली हैं। मानक से अधिक छात्र-छात्राओं को प्रवेश देकर जाने-अनजाने में उनके कैरियर के साथ खिलवाड़ किया जाता हैं।
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