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एएमयू में ‘तीसरी आंख’ को हुआ ‘मोतियाबिंद’

Fri, 26 Apr 2013 05:30 AM IST
Aligarh
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अलीगढ़। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) में 20 अप्रैल की रात हुए गेस्ट हाउस कांड के बाद सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की बात कही जा रही हैै। विचारणीय प्रश्न यह भी है कि जो कैमरे पहले से लगे हुए हैं वह कितनी दक्षता से काम कर रहे हैं? पड़ताल करने पर पता चला कि लगभग 30 फीसदी कैमरे तो कैंपस में खराब ही पड़े हैं। इनमें कुछ कैमरे मेडिकल कॉलेज के भी हैं। कहा जा रहा है कि कैमरों की खरीद में चल रही जांच के चलते कंपनी की ओर से कैमरों का मेंटेनेंस कार्य नहीं किया जा रहा है, जिसके चलते यह स्थिति आई है।
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तीन वर्ष पहले कैंपस में कई स्थानों पर करीब 2.10 करोड़ रुपये की लागत से सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। तब गोपनीयता का हवाला देते हुए कैमरे लगाए जाने का विरोध भी किया गया था। विश्वविद्यालय सूत्रों के मुताबिक जो कैमरे खराब हैं उसका कारण एक खास पार्ट का डिस्टर्ब होना है जो कि मुंबई में मिलेगा। उस पार्ट की खरीद और इंस्टॉल होने के इंतजाम में यह कैमरे खराब पड़े हुए हैं। यह खराब कैमरे लड़कियों का इंदिरा गांधी हॉल, तिब्बिया कॉलेज, मेडिकल कॉलेज सहित मुख्य कैंपस में लगे हुए हैं। गुजरा वक्त गवाह है कि कैमरे लगने के बाद भी कैंपस में हिंसा और फायरिंग की घटनाएं होती रहीं। वर्तमान में निलंबित चल रहे छात्र संघ अध्यक्ष शहजाद आलम ने पूर्व कुलपति प्रो. पीके अब्दुल अजीज के समय आरटीआई आवेदन के माध्यम से इनकी खरीद और फर्म आदि के संबंध में जानकारी भी मांगी थी।
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