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5 साल के लिए शिक्षा का अधिकार लागू

Mon, 01 Apr 2013 05:30 AM IST
Aligarh
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अलीगढ़। तीन साल बाद भी अलीगढ़ में शिक्षा के अधिकार को जमीन तलाशी जा रही है। लापरवाह प्रशासनिक मशीनरी इसको ठीक से लागू नहीं कर पाई, अब एक अप्रैल से पांच साल के लिए इसे फिर से लागू कर दिया गया है। आज तक संचालित की जा रही शिक्षा परियोजना का अस्तित्व खत्म हो गया है। ऐसे में क्या उम्मीद होगी? यह आने वाला समय ही बताएगा, क्योंकि इस वित्तीय वर्ष में जो रक म मिली उसमें से भी अधिकारियों की उदासीनता के चलते 31 मार्च को 3 करोड़ 60 लाख रुपये वापस कर दिए गए।
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जुलाई 2011 में शिक्षा का अधिकार कानून अपनाया गया था। लंबा समय गुजर जाने के बाद भी शिक्षा का अधिकार अलीगढ़ में सिसक रहा है। प्राइमरी स्कूलों में छात्रों की संख्या बढ़ने के स्थान पर कम हो गई है। आंकड़े बताते हैं कि पिछले साल छात्र संख्या 2.25 लाख थी लेकिन इस साल घटकर 2.20 लाख रह गई। जबकि आबादी के हिसाब से छात्र संख्या बढ़नी चाहिए थी। हालत यह हैं कि बच्चों को बस्ता और किताबें भी नहीं मिल रहे हैं, जो भी मिले हैं, उनकी क्वालिटी को लेकर प्रश्नचिह्न लग चुका है। ड्रेस और खाने पीने के लिए मिली रकम इस्तेमाल नहीं हो पाई और उसे वापस कर दिया गया।
ये रकम हुई वापस
जिले के 125 इंटर कॉलेज में पढ़ने वाले 25 हजार छात्रों को इन कॉलेजों के प्रिंसिपल ने मिड डे मील नहीं बांटा। इस वजह से मिड डे मील कन्वर्जन तथा बर्तनों के एक करोड़ 53 लाख रुपये वापस हुए हैं। इसी तरह इन बच्चों की ड्रेस के एक करोड़ रुपये वापस कर दिए हैं। इसके पीछे कॉलेजों के प्रिंसिपलों का कहना है कि ड्रेस के लिए रकम कम थी, इसलिए अव्यवहारिक मानकर वापस कर दिया है। मिड डे मील का इंतजाम भी करना टीचरों को मुश्किल था।
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फर्जी छात्र संख्या पर अंकुश लगने के कारण यह कमी आई है, अब क्वालिटी पर जोर दिया जा रहा है। इंटर कॉलेजों में संचालित प्राइमरी के बच्चों को ड्रेस तथा मिड-डे मील की व्यवस्था नहीं हो पाई। उन्हीं के मद की यह रकम वापस हुई है, जबकि निर्माण की राशि को पूरी तरह से इस्तेमाल कर लिया है। अब इस तरह की प्लानिंग की जा रही है कि अगले वित्तीय वर्ष की धनराशि वापस न हो। - राजीव रौतेला, डीएम
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