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एएमयू में आरक्षण की बात, ध्रुवीकरण का सियासी राग

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न्यूज डेस्क, अभिषेक शर्मा, अलीगढ़।
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भाजपा के बूथ सम्मेलन में सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने केंद्र में सत्तासीन अपनी ही पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के सामने एएमयू में आरक्षित वर्ग को आरक्षण का लाभ न मिलने का सवाल उठाकर क्या कहना चाह रहे थे? यह सवाल किससे था? कहीं यह आरक्षित वर्ग बाहुल्य पश्चिमी यूपी में वोटों के ध्रुवीकरण की कोशिश तो नहीं थी? इसे लेकर विपक्षी दलों ने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए सीधे-सीधे कहा है कि चुनाव से ऐन पहले भाजपा अपनी आदत के अनुसार वोटों के ध्रुवीकरण के लिए भावनाएं आहत करने के इरादे से इस तरह की बयानबाजी करती है। उसी इरादे से अलीगढ़ से एएमयू को लेकर यह बयान मुख्यमंत्री ने दिया है।

यह जगजाहिर है कि ब्रज क्षेत्र और पश्चिमी यूपी आरक्षित वर्ग (अनुसूचित जाति) बाहुल्य है। बेशक 2014 के लोकसभा और 2017 के विधानसभा चुनाव में ब्रज व पश्चिम में भाजपा का डंका बजा हो, मगर दोनों चुनावों में आमना-सामना बसपा से रहा और बसपा दूसरे नंबर की पार्टी रही।
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2017/2018 के निकाय चुनाव में पश्चिम यूपी के दो बड़े महानगर अलीगढ़ और मेरठ में बसपा ने मेयर जिताकर इस क्षेत्र में अपनी ताकत का अहसास करा दिया। साथ में पूरे पश्चिम में नगर पंचायत व नगर पालिकाओं में भी बसपा मजबूत रही। इन्हीं परिणामों को देखकर सपा-बसपा के गठबंधन में जो संकेत हैं, उसके अनुसार पश्चिम में सर्वाधिक सीटों पर बसपा चुनाव लड़ेगी और सामना भाजपा से ही होगा।

ऐसे में बुधवार को तालानगरी में ब्रज क्षेत्र के बूथ अध्यक्ष सम्मेलन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह सवाल उठाया कि एएमयू केंद्र से सालाना 150 से 300 करोड़ अनुदान पाने वाली देश की बड़ी यूनीवर्सिटी है। यह अनुदान इसे जनता द्वारा दिए जाने वाले टैक्स से मिलता है।

बावजूद इसके इस यूनीवर्सिटी में हमारे आरक्षित वर्ग के बच्चों को दाखिले के समय आरक्षण का लाभ क्यों नहीं मिलता, जबकि यह अल्पसंख्यक संस्थान नहीं है। यह सब कांग्रेस की देन है। उनके इस बयान पर विपक्ष यही कह रहा है कि जब भाजपा के पास दिखाने और कहने को कुछ नहीं है तो पार्टी के मुख्यमंत्री चुनाव से पहले भावनाएं आहत करने जैसे बयान अलीगढ़ से वोटों के ध्रुवीकरण के इरादे से दे रहे हैं।

-भाजपा उपलब्धियों के नाम पर शून्य है। गठबंधन से घबरा रही है। ऐसे में सांप्रदायिक बातें करके लोगों को बांटने के आधार पर राजनीति के अलावा भाजपा कुछ नहीं कर सकती। सामने हार दिख रही है। इसलिए ध्रुवीकरण के इरादे से मुख्यमंत्री इस तरह के बयान दे रहे हैं। अब जब उनकी सरकार है तो एएमयू में आरक्षण का लाभ दिला क्यों नहीं देते। अपनी ही सभा में सवाल किससे पूछ रहे हैं।
-अशोक यादव, सपा जिलाध्यक्ष

-यह अजीब बात है कि जब वह खुद केंद्र व प्रदेश में हैं और अपनी ही रैली में लोगों से सवाल पूछ रहे हैं कि आरक्षण का लाभ एएमयू में नहीं मिल रहा। यह लोगों को बांटने की राजनीति नहीं तो और क्या है। अपनी आदत के अनुसार लोगों को बांटने की राजनीति करने जैसे बयान भाजपा के नेतागण दे रहे हैं। अगर आरक्षित वर्ग को आरक्षण की इतनी याद है तो दिला क्यों नहीं देते जरूरतमंदों को इस आरक्षण का लाभ।
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-विवेक बंसल, राष्ट्रीय सचिव कांग्रेस

-एएमयू और आरक्षित वर्ग को जोड़कर लोगों को बांटने की राजनीति करने के बजाय भाजपा के लोग पहले अपने गिरेबां में झांक कर देख लें। क्या देश के सभी केंद्रीय संस्थानों में यह लाभ आरक्षित वर्ग को मिल रहा है। और यह सवाल किसी से पूछने की जरूरत क्या है। वह खुद सरकार में हैं लोगों को इसका लाभ दिलाकर दिखाएं। बांटने की राजनीति न करें।
-तिलकराज यादव, बसपा जिलाध्यक्ष
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