तीन हत्यारों को सुनाई आजीवन कारावास की सजा
ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
एडीजे द्वितीय सुरेश चंद्र चतुर्थ के न्यायालय से एक अध्यापक की हत्या के तीन आरोपियों को आजीवन कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड न देने पर दोषियों को अतिरिक्त कारावास भोगना होगा।
अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता एडीजीसी मो. शारिक के अनुसार ललतेश पाठक शांति उमा विद्यालय कसेर में पढ़ाता था। उसका गांव कसेर के ही सुनील व सुखवीर से किसी बात को लेकर विवाद हो गया।
20 मार्च 2012 को जब वह स्कूल से पढ़ाकर लौट रहा था तो आरोपियों ने ललतेश को पकड़ लिया और हसिया, दराती आदि धारदार हथियारों से उसकी हत्या कर दी। घटना की नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।
विवेचना अधिकारी ने तीन आरोपियों सुनील, सुखवीर पुत्रगण गीतम सिंह, पप्पू पुत्र वीरी सिंह निवासीगण कसेर थाना दादों के खिलाफ आरोपपत्र कोर्ट में दाखिल किया। इस मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वितीय सुरेशचंद चतुर्थ के न्यायालय में हुई। कोर्ट ने तीनों अभियुक्तों को आजीवन कारावास और दस-दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
बच्चे की बलि के आरोपी की जमानत याचिका खारिज
गभाना के गांव ओगर में बच्चे की बलि के आरोपी की जमानत याचिका सेशन न्यायाधीश श्रीमती कल्पना मिश्रा ने खारिज कर दी है। अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता डीजीसी डॉ. अबसार किदवई के अनुसार नौ वर्षीय गौरव पुत्र तेजपाल सिंह 23 जुलाई की शाम छह बजे गायब हो गया था। बाद में उसका शव एक अरहर के खेत में मिला था।
गौरव की मां रजनी ने पुलिस को यह बताया कि नत्थीलाल उसके बेटे को ले गया था। उसने यह भी बताया कि नत्थीलाल की लड़की कमलेश के कोई संतान नहीं थी। इस पर एक भगत के कहने पर कुत्ते की बलि चढ़ाई थी, लेकिन फिर भी संतान नहीं हुई तो नत्थीलाल ने संतान की आशा में उसके लड़के गौरव की बलि चढ़ाई है। इस मामले में आरोपी की ओर से जमानत के लिए याचिका दायर की गई। जमानत याचिका को सेशन न्यायाधीश ने निरस्त कर दिया है।