एएमयू के जेएन मेडिकल कॉलेज में 110 अस्थायी कर्मचारी तैनात हैं। कर्मचारियों ने बताया कि वह 8-10 साल से काम कर रहे हैं। मेडिकल कॉलेज प्रशासन लगातार उन्हें नौकरी से हटाने का तरकीब ढूंढ रहा है।
अलीगढ़ के जेएन मेडिकल कॉलेज में 90 अस्थायी कर्मचारियों की नौकरी पर तलवार लटक गई है। नौकरी से हटाने की सुगबुगाहट से उनकी नींद और परिवार का सुकून छिन गया है।
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मेडिकल कॉलेज में 110 अस्थायी कर्मचारी तैनात हैं। कर्मचारियों ने बताया कि वह 8-10 साल से काम कर रहे हैं। मेडिकल कॉलेज प्रशासन लगातार उन्हें नौकरी से हटाने का तरकीब ढूंढ रहा है। पहले एक सप्ताह में कर्मचारी तीन दिन ही काम करेंगे, लेकिन इसका विरोध शुरू हो गया। कॉलेज प्रशासन बैकफुट पर आ गया। कर्मचारियों से कहा कि वह अपने परिजन की आईडी लगाकर एक सप्ताह में चार दिन वह काम कर सकते हैं। इस पर कर्मचारी राजी हो गए।
पिछले दिनों कॉलेज प्रशासन ने अपने आदेश को बदलते हुए कहा कि जिसकी आईडी लगेगी, वही काम करेगा। कर्मचारियों ने कहा कि उनके साथ लगातार धोखा हो रहा है। नए कर्मचारियों की भर्ती अंदरखाने हो रही है। उन्होंने कहा कि उन्हें नौकरी से न निकाला जाए। केंद्र सरकार से निर्धारित मानदेय है, मिले। कर्मचारियों ने कहा कि उन्हें धमकाया जा रहा है। कर्मचारियों को कई समूह में बांटा जा रहा है। 20 कर्मचारियों से प्रशासन काम ले रहा है।
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कर्मचारियों ने अपनी पीड़ा कामरेड डॉ. शमीम अख्तर से व्यक्त की। इस संबंध में मेडिकल सुपरिटेंडेंट प्रो. सैयद अमजद अली रिजवी ने बताया कि दूसरी आईडी पर काम करने वाली परंपरा पर इंतजामिया ने रोक लगा दी है, जो जगह खाली है, वह भरी जा रही है।