क्राइम डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
रिश्वतखोरी में स्वास्थ्य विभाग के संविदा तकनीशियन की गिरफ्तारी के बाद पुलिस भर्ती मेडिकल की पूरी प्रक्रिया सवालों के घेरे में आ गई है। जिस संविदाकर्मी को गिरफ्तार किया है, उससे पूछताछ व जांच में खुलासा हुआ है कि वह अब तक एक दर्जन आवेदकों से रकम ऐंठ चुका था।
इसे लेकर पुलिस अब उससे जुड़े डॉक्टरों व उसके मोबाइल संपर्क वाले लोगों को जांच की जद में ला रही है। माना जा रहा है कि जांच में कई बड़े नामों पर शिकंजा कसा जा सकता है। इधर, एसएसपी ने इस मामले में जिलाधिकारी को मेडिकल बोर्ड की जांच कराने संबंधी पत्र लिखा है।
जिस पर विभागीय जांच अलग से शुरू करा दी गई है। वहीं गिरफ्तार किए गए संविदाकर्मी को गुरुवार को सिविल लाइंस पुलिस ने मेरठ की भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट में पेश किया, जहां रिमांड के बाद उसे जेल भेज दिया गया।
एसएसपी आकाश कुलहरि के अनुसार गोंडा के गांव ढांड़ निवासी कैलाश चंद्र ने उनसे शिकायत की थी कि उनके बेटे विनीत कुमार से मेडिकल फिटनेस के नाम पर 50 हजार रुपये मलखान सिंह जिला अस्पताल के संविदा तकनीशियन (ईएनटी जांच करने वाला) सुशील कुमार निवासी 42 त्योनधारी रामपुर बघेलान सतना मध्य प्रदेश हाल निवासी विद्या नगर क्वार्सी ने 50 हजार रुपये लिए हैं।
आरोप था कि उसे धमकाया गया कि अगर रुपये नहीं दिए तो फेल कर दिया जाएगा। इस शिकायत पर सुशील को बड़े डाकघर के पास से गिरफ्तार किया। उसकी जेब से पुलिस भर्ती का बुलावा पत्र और रकम बरामद की गई।
पूछताछ में उसने अब तक एक दर्जन लोगों से इस तरह रकम वसूलना स्वीकारा।
जांच में यह बात भी उजागर हो रही है कि उसके कई डॉक्टरों व अन्य लोगों से लगातार इस विषय संपर्क थे। एसएसपी के अनुसार फिलहाल आरोपी को मुकदमा दर्ज कर मेरठ कोर्ट से जेल भेजा गया है। वहीं उसने अब तक किन लोगों से रुपये वसूले, किसकी मदद से उन्हें पास कराया, कौन-कौन लोग रैकेट में शामिल हैं।
इन सभी पहलुओं पर जांच की जा रही है। वहीं पूर्व में हुई गड़बड़ी आदि को लेकर जिलाधिकारी स्तर से भी जांच कराई जा रही है। बता दें कि एसएसपी ने इस तरह की शिकायतों पर सर्विलांस टीम को ट्रैप करने के लिए लगाया था, जिसके आधार पर यह सफलता मिली है।