फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पौने तीन करोड़ की एबीसी रोकेगी बिजली के हादसे

Fri, 26 Apr 2019 01:18 AM IST
राजेश सिंह न्यूूज डेस्क, दीपक शर्मा  अलीगढ़।
विज्ञापन
demo
विज्ञापन
ग्रामीण और शहरी इलाकों में बिजली के तार टूटने से होने वाले अग्निकांड और हादसों को रोकने के लिए विभाग अब जर्जर हो चुके तारों की जगह, यहां पर एरियल बंडल्ड कंडक्टर्स (एसीबी) डालने जा रहा है।  ग्राम स्वराज्य योजना के तहत 288 करोड़ रुपये की लागत से पहले चरण में 69 फीडरों को अलग किया जा रहा है।
विज्ञापन


ग्रामीण इलाकों में गांवों को अलग और ट्यूबवेल (कृषि एवं गैर कृषि श्रेणी के तहत) को अलग अलग बिजली दी जाएगी। जिले में एक हजार की आबादी से बड़े 925 गांव और मजरे हैं। जिनमें यह काम होना है। 

क्या है एसीबी
यह खंभे ऊपर से गुजरने वाले तारों का वह समूह है जो कि एक दूसरे से गुंथा रहता है। इनमें इंश्यूलेटेड फेज रहते हैं। एक बिना इंश्यूलेशन के न्यूट्रल रहता है। प्रत्येक कंडक्टर एक इंश्यूलेटर से घिरा रहता है। (सिवाय न्यूट्रल के)
विज्ञापन


गांव और ट्यूबवेल को अलग फीडर, विभाग को फायदा
अधीक्षण अभियंता (ग्रामीण) धर्मेंद्र सारस्वत बताते हैं कि अब तक ट्यूबवेल और गांव दोनों को 18 घंटे बिजली दी जा रही है, जिससे विभाग को ही हानि हो रही है। आने वाले समय में गांवों को 24 घंटे और ट्यूबवेलों को 10 घंटे बिजली देने का लक्ष्य है। ऐसा होने से डिमांड घटेगी। जब फीडर अलग अलग होगा तो आपूर्ति भी अलग अलग होगी। इससे पीक आवर में मांग घटेगी और विभाग को ‘पीक आवर’ में महंगी बिजली नहीं खरीदनी पड़ेगी। (सामान्य घंटों में 3 रूपये यूनिट तो पीक आवर में 7 से 12 रुपये तक की बिजली खरीदनी पड़ जाती है) इसका सीधा फायदा विभाग के राजस्व में होगा।

क्या हैं एसीबी के फायदे
- अंदरूनी और बाहरी कारणों, जैसे पेड़ गिरने जैसी स्थिति में शार्ट सर्किट का खतरा बहुत ही कम हो जाता हैै
- पेड़ों, खड़ी फसलों के ऊपर, भवनों के पास से सुरक्षित रूप से गुजर सकता है, स्पार्किंग नहीं होती है
- इसको फैलाना और स्थापित करना आसान है। प्रत्येक खंभे पर इंश्यूलेटर की जरूरत नहीं होती है

- जंक्शन प्वाइंट्स पर भी इनको कनेक्ट करना और इंश्यूलेटेड करना आसान होता है 
- बिजली चोरी की संभावना बहुत ही कम हो जाती है, कोई करता है तो पता लगाना आसान होता है
कितना मुआवजा
जन हानि यानि जान जाने पर पीड़ित परिवार को पांच लाख। घायल होने पर 50 हजार से एक लाख तक।  मवेशी, भैंस आदि के मरने पर 30 हजार। अन्य जानवरों के लिए अलग-अलग राशि है।
 
प्रोफार्मा 44 के तहत आवेदन, ऐसे मिलता है मुआवजा
नगरीय विद्युत वितरण खंड चतुर्थ के अधिशासी अभियंता अखिलेश कुमार बताते हैं कि बिजली के कारण हादसा होने पर विभाग द्वारा मुआवजे का भी प्रावधान है। इसमें मानवीय हानि और फसल की हानि के लिए अलग अलग प्रक्रिया हैं। विभाग के प्रोफार्मा 44 के तहत आवेदन करना होता है । इसके बाद कई चरणों से सत्यापन की प्रक्रिया से गुजरने के बाद अंतिम मुहर लग जाती है। 

जनहानि होने पर 
घटना के बाद एसडीओ स्तर से घटना की सूचना संबंधित लाइन इंस्पेक्टर को दी जाएगी। साथ ही घटना का शिकार पक्ष विभाग में प्रोफार्मा 44 पर मुआवजे के लिए आवेदन कर देगा। लाइन इंस्पेक्टर और विद्युत सुरक्षा उप निदेशक इस बात की जांच करेगा कि घटना वास्तव में विभाग के कारण या विभागीय गलती से हुई है या नहीं।

विभागीय गलती जाहिर होने पर इसकी रिपोर्ट वह अधिशासी अभियंता को और यहां से अधीक्षण अभियंता पर पहुंचेगी। विभागीय स्तर से मुआवजा प्रदान कर दिया जाएगा। विभाग की गलती नहीं होने पर दावा खारिज कर दिया जाएगा। पीड़ित पक्ष अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है।
 
संपत्ति की क्षति होने पर 
घटना के बाद एसडीओ स्तर से घटना की सूचना संबंधित लाइन इंस्पेक्टर को दी जाएगी। साथ ही घटना का शिकार पक्ष विभाग में प्रोफार्मा 44 पर मुआवजे के लिए आवेदन कर देगा। यहां से घटना में तहसील प्रशासन औैर एसडीएम की भी एंट्री होगी। वह प्रति हेक्टेयर क्षतिग्रस्त हुई फसल का मूल्य तय करेंगे या संपत्ति के मूल्य का आंकलन करेंगे।

लाइन इंस्पेक्टर विभागीय गलती होने या नहीं होने की जांच करेगा। दोनों अपनी रिपोर्ट बिजली विभाग के अधीक्षण अभियंता को सौंप देंगे। दावा सही होने की स्थिति में भुगतान हो जाएगा। नहीं होने पर खारिज, पीड़ित अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है। 
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें