---------
हेडिंग....
आखिर ‘निर्भया’ कब बनेगी ‘शक्ति’
सब हेड....
देश के सबसे बड़े चुनाव के दौर में नवरात्र, मगर महिला सुरक्षा और आदि शक्ति सम्मान पर नहीं हो रही कोई बात
---इस सिस्टम के सहारे महिला सुरक्षा---
-1090 वीमेंन पावर लाइन यूपी पुलिस का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट
-एंटी रोमियो स्क्वायड जिला और हर थाना स्तर पर भी है सक्रिय
-निर्भया फंड के जरिये तमाम आधी अधूरी सुविधाओं का है दावा
-घरेलू हिंसा से निपटने के लिए पुलिस व कोर्ट में मीडिएशन सेंटर
-मीडिएशन में पहले सुलह का प्रयास, फिर मुकदमे की होती बात
-----
--पुलिस तक पहुंचती शिकायतें
5 से 7 घरेलू हिंसा की शिकायतें प्रतिदिन यहां के महिला थाने में पहुंचती हैं
10 के करीब घरेलू हिंसा की शिकायतें हर रोज परिवार परामर्श केंद्र में दर्ज
2 से 3 महिला उत्पीड़न के मुकदमे महिला थाना में कराए जा रहे हर रोज दर्ज
2 से 5 हर तरह की शिकायतें वीमेंन पावर लाइन में भी जिले से होती हैं दर्ज
---
अभिषेक शर्मा
अलीगढ़। आज नवरात्र का पहला दिन है। घर-घर में आदि शक्ति का पूजन शुरू होने जा रहा है और दूसरी ओर देश में इन दिनों सबसे बड़ा चुनाव भी लड़ा जा रहा है। जात-पात से लेकर सड़क, सफाई, बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य आदि मुद्दों और विकास पर खूब चर्चा हो रही है। मगर एक ज्वलंत मुद्दा ऐसा भी है, जिस पर नेताओं का शायद ध्यान नहीं है। मुद्दा है आधी आबादी की सुरक्षा और आदि शक्ति के सम्मान का। कोई नेता इस मुद्दे पर संवेदनशील नहीं दिख रहा। इसका ताजा उदाहरण सामने है। बात ज्यादा नहीं पांच दिन पुरानी है। यहां 30 मार्च को हरदुआगंज क्षेत्र में गांव से पैदल फोटो स्टेट कराने बाजार आई दसवीं की छात्रा संग दरिंदों ने खींच ले जाकर सामूहिक दुष्कर्म कर डाला। दिनदहाड़े सनसनीखेज वारदात से पूरा इलाका सहम गया और पुलिस भी हिल गई। मगर हैरान करने वाली बात है कि सियासी समर में भाग्य आजमा रहे किसी नेता ने इस ज्वलंत मुद्दे पर आवाज उठाना तो दूर बच्ची या उसके परिवार को सांत्वना देने तक की जहमत नहीं उठाई। यह हाल है हमारे नेताओं की संवेदनहीनता का। जब वह चुनावी दौर में इस तरह घटनाओं के प्रति संवेदनशील नहीं हैं तो आगे महिला सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषय पर कितने चिंतित होंगे खुद ही अंदाजा लगाया जा सकता है। फिर आधी आबादी सिस्टम के सहारे रह जाती है, सिस्टम जो चाहे, जैसा चाहे न्याय दे दे पीड़ित को उसी के सहारे रहना पड़ता है। ऐसे में नवरात्र में आदि शक्ति की पूजा तब तक बेमानी है, जब तक कि निर्भया शक्ति का रूप न ले ले।
--
एंटी रोमियो और वीमेन पावर लाइन का हाल
दिल्ली के निर्भया कांड के बाद एक तरफ जहां देश के कानून में बदलाव हुए और घूरने व पीछा करने तक पर कड़ा कानून बना। इसी तरह जिला व थाना स्तर पर एंटी रोमियो स्क्वायड गठित है। प्रभारी इंस्पेक्टर शीला चौधरी स्वीकारती हैं कि उनकी टीम शिक्षण संस्थानों, इंस्टीट्यूटों में जाकर छात्राओं, युवतियों को जागरूकता टिप्स देती है। मगर आज तक उनके पास कोई शिकायत नहीं आई। उनका मानना है कि सीधे शिकायतें थाने या 1090 पर पहुंचती हैं, इसलिए एंटी रोमियो स्क्वायड पर शिकायत नहीं पहुंचीं। इसके अलावा शहर में एक शक्ति मोबाइल भी कॉलेज टाइम में छात्राओं के कॉलेज के इर्द गिर्द व शाम के समय महिलाओं से व्यस्त रहने वाले बाजार में भ्रमणशील रहती है। बावजूद इसके शहर में झपटमारी की घटनाओं पर नियंत्रण नहीं है। वहीं अगर हम बात वीमेंन पावर लाइन 1090 की करें तो उस पर पहुंचने वाली शिकायत तत्काल संबंधित थाने को ट्रांसफर की जाती है। थाना स्तर से उसका निस्तारण किया जाता है आर पीड़ित से फीडबैक भी लिया जाता है। अपने जिले से हर रोज आधा दर्जन शिकायतें अनुमानित वीमेंन पावर लाइन पर पहुंचने का आंकड़ा दर्ज है।
खास बातें--
-निर्भया फंड में नहीं मिला एक भी धेला, न आया एक भी केस:-जिला प्रोबेशन अधिकारी स्मिता सिंह के अनुसार इस स्कीम मेें एक साल में एक भी केस नहीं आया है। इस वजह से कोई भी फंड नहीं मिला है। बता दें कि निर्भया फंड से दुष्कर्म पीड़ित व आश्रितों के पुनर्वास और दस लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता का प्राविधान है।
-निर्भया फंड से महिला यात्रियों की सुरक्षा को मिली दो इंटरसेप्टर वैन:-निर्भया फंड से परिवहन निगम को महिला यात्रियों की सुरक्षा के लिए दो इनोवा कार (इंटरसेप्टर) मिली हैं। फिलहाल यह हाथरस व एटा मार्ग पर लगी हैं। जल्द ही दोनों गाड़ियों को महिला सुरक्षा हैल्प लाइन से जोड़ा जाएगा। वैन का काम बसों में महिलाओं की सुरक्षा करना है।
-रोडवेज के अलीगढ़ रीजन को नहीं मिली एक भी पिंक बस:-निर्भया फंड से अलीगढ़ रीजन के हिस्से एक भी पिंक बस नहीं आई। हां, एक अप्रैल से एक बस रात आठ बजे लखनऊ से आती है, जो सुबह 8 बजे लखनऊ जाती है। वहीं आगरा फोर्ट डिपो की एक पिंक बस का भी ट्रायल के रूप में अलीगढ़ तक संचालित है। यह बसें केवल महिलाओं के लिए हैं।
-ट्रेनों में महिला सुरक्षा को लेकर नहीं कोई ठोस इंतजाम:-महिला को सुरक्षा की चिंता ट्रेन में सफर करने के दौरान भी है। एक साल में जीआरपी ने 10 मुकदमे छेड़खानी के दर्ज किए हैं। मगर टूंडला, अलीगढ़ से दिल्ली तक चलने वाली लोकल पैसेंजर में सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं।
---
पिछले तीन माह का तुलनात्मक महिला अपराध- प्रतिवर्ष1 जनवरी से 31 मार्च तक
--------------------------------------------------------------
वर्ष हत्या दुष्कर्म शीलभंग अपहरण छेड़खानी उत्पीड़न दहेज हत्या चेन स्नेचिंग
2019 13 11 89 58 01 81 09 0
2018 08 27 98 111 00 79 12 2
2017 09 23 54 86 04 48 14 2
-----------------------------------------------------------------------------------
पिछले तीन साल का तुलनात्मक महिला अपराध-पिछले तीन साल
--------------------------------------------------------------------
वर्ष हत्या दुष्कर्म शीलभंग अपहरण छेड़खानी उत्पीड़न दहेज हत्या
2018 29 93 303 404 11 380 54
2017 32 104 310 403 18 356 60
2016 42 87 209 293 11 268 56
------------------------------------------------------------------------
महिला को सुरक्षित तो कहीं नहीं माना जा सकता है। महिला स्वयं की रक्षा कर ले तो खुद सुरक्षित है। महिलाओं की सुरक्षा के लिए सख्त कानून लाने चाहिए। देखना चाहिए घरेलू हिंसा हो या राह चलते छेड़खानी, अगर शिकायत की जाए तो उसकी सुनवाई जल्द और कड़े तरीके से होनी चाहिए। जिससे कोई भी महिला अपने आप को असुरक्षित महसूस न करे।
- श्वेता शर्मा, होली चौक मसूदाबाद ।
महिला सुरक्षा एक ऐसा विषय है, जिस पर राजनेता गंभीरता से ध्यान नहीं दे रहे। सबसे बड़ी जरूरत है महिला संबंधी अपराध में त्वरित कार्रवाई और सख्त कार्रवाई की। अगर समय रहते ऐसा होने लगे तो आने वाले समय में महिला अपराध में लगातार कमी आएगी। महिला अपराध होने पर न्याय के लिए भटकती है और आरोपी को बल मिलता है।
- भूमिका दीपक सासनी गेट