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एएमयू बवाल की 80 फीसदी जांच पूरी, घायल छात्रों ने बनाई दूरी

Sat, 18 Jan 2020 02:49 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
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AMU - फोटो : अमर उजाला
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एएमयू में 15 दिसंबर 2019 को हुए बवाल के बाद हाईकोर्ट के निर्देश पर मामले की जांच के लिए आई राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की टीम पांच दिन अलीगढ़ में रुकने के बाद दिल्ली रवाना हो गई। इन पांच दिनों में 117 लोगों के बयान दर्ज हुए, जिसमें एएमयू प्र्रशासन, छात्र, जिला प्रशासन और पुलिस शामिल हैं। टीम अब 24 जनवरी के बाद आएगी। टीम की 80 फीसदी जांच पूरी हो गई है। 

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अब एएमयू के आफताब हाल के कमरा नंबर 46 की फारेंसिक रिपोर्ट आना बाकी है और सीसीटीवी फुटेज का परीक्षण शेष बचा है। इन पर सभी की निगाहें हैं। वहीं 25 घायल छात्रों, पीएसी व आरआरएफ के बयान होना शेष रह गया है। पांच दिन यहां रुकी टीम के बुलावे पर भी यह छात्र बयान दर्ज कराने नहीं पहुंचे हैं। इसलिए मोहलत दी गई है कि यह लोग अगर चाहें तो दिल्ली आकर भी बयान दर्ज करा सकते हैं।

आयोग की टीम के पास 250 वीडियो और सीसीटीवी फुटेज आई हैं। इन वीडियो फुटेज में घटना की सारी कहानी कैद है। इन वीडियो फुटेज का अब सिर्फ विश्लेषण और परीक्षण बाकी है। हास्टल के कमरा नंबर 46 की फारेंसिक रिपोर्ट को इसलिए अहम माना जा रहा है कि अगर इसमें आग उन्हीं तत्वों से लगी होगी जो कि फोर्स प्रयोग करता है तो स्थिति कुछ और होगी। लेकिन अगर रिपोर्ट कहीं और इशारा करती है तो दूसरी स्थिति बनेगी। इस रिपोर्ट पर काफी कुछ निर्भर करेगा। 
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इसके अलावा  25 घायलों की सूची जो आयोग को मिली है उनमें से एक-दो को छोड़कर बाकी सभी के बयान दर्ज होने बाकी है। माना जा रहा है कि वह आयोग की टीम के समक्ष आना नहीं चाह रहे हैं। इस संबंध में  छात्र नेताओं की दलील है कि वह घायल लोग  बाहर हैं। तो इस पर आयोग की टीम ने कहा है कि या तो वह दिल्ली आ जाएं या टीम के कुछ सदस्य यहां आ जाएंगे। 

टीम के मुताबिक 80 फीसदी बयान दर्ज हो चुके हैं सिर्फ रैपिड रेस्पांस फोर्स (आरआरएफ) और पीएसी के कोई बयान नहीं हुए हैं। इनके बयान होना भी महत्वपूर्ण है। यह बयान अब टीम के दोबारा यहां आने पर होंगे। वहीं जरूरत समझी गई तो वरिष्ठ अधिकारियों के हमराहों से भी बयान दर्ज कराने को कहा जा सकता है।

आरोपी बोले हम घटना स्थल पर नहीं

शुक्रवार को छात्र नेता नदीम अंसारी, हमजा सूफियान, आमिर और एक अन्य ने कहा कि हम घटना स्थल पर नहीं थे। बाहर थे। इस संबंध में साक्ष्य भी दिए। इस पर टीम ने कहा कि यह प्रासंगिक नहीं है। यह पुलिस जांच का हिस्सा है। अगर जरूरत होगी तो साक्ष्यों को आयोग की रिपोर्ट में शामिल करेंगे।

आखिरी दिन पुलिस और प्रशासन के बयान पूरे
शुक्रवार को पुलिस प्रशासन व आरएएफ के सभी अधिकारियों के बयान हो गए। एसपी सिटी से लेकर जो भी 15 दिसंबर की घटना के वक्त मौजूद था, उसके बयान हो गए। इनमें एसपी क्राइम, एसपी यातायात, एसपी देहात, सीओ प्रथम, सीओ द्वितीय, सीओ तृतीय, सीओ अतरौली, सीओ खैर, सीओ बरला, शहर के सभी एसओ, इंस्पेक्टर आदि शामिल हैं। इसके अलावा एडीएम सिटी से लेकर जो भी मजिस्ट्रेट घटना स्थल पर मौजूद थे, उनके भी बयान हुए। 

आरएएफ के द्वितीय कमांडेंट को छोड़कर आरएएफ के अन्य सभी एक दर्जन के करीब अधिकारी/कर्मचारियों के बयान हो गए। इस दौरान टीम के अधिकारियों ने एडीजी आगरा जोन अजय आनंद, डीआईजी डॉ.प्रीतिंदर सिंह, डीएम चंद्रभूषण सिंह से भी मौखिक संवाद किया और घटना की जानकारी मांगी है। वजह यह है कि वरिष्ठ अधिकारी होने के नाते यह तीनों अधिकारी भी मौके पर आए थे और डीआईजी तो पत्थर लगने से जख्मी भी हुए थे। वहीं टीम ने मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल और दीन दयाल से घालयों के मेडिकल परीक्षण संबंधी दस्तावेज भी जुटाए हैं। 
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और दो छात्रों ने आयोग को बयान दर्ज कराए

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की जांच टीम के समक्ष एएमयू में हुई हिंसा में घायल हुए छात्रों ने शुक्रवार भी को बयान दर्ज कराए। शुक्रवार को दो छात्रों ने बयान दर्ज कराए, जिसमें कहा कि घटना के वक्त वह उपद्रव स्थल पर नहीं थे। एक छात्र ने कहा कि वह गेस्ट हाउस नंबर तीन में था तो एक ने कहा कि वह चुंगी गेट पर था। दोनों ने ही कहा कि उनके कथन के साक्ष्य के रूप में सीसीटीवी वीडियो फुटेज देखी जा सकती है। इसी के साथ आयोग की टीम वापस भी चली गई।

 एएमयू में 15 दिसंबर 2019 को हुए बवाल में हाईकोर्ट में 13 याचिकाएं पहुंची हैं। इनको एक जगह समाहित किया गया है। हाईकोर्ट के आदेश पर ही राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की टीम मामले की जांच कर रही है। इस मामले को हाईकोर्ट तक पहुंचने वाले अधिवक्ता असद हयात ने बताया कि शुक्रवार को दो छात्र जुनैद आमिर और विलाल बेग ने अपने बयान दर्ज कराए। जुनैद आमिर ने आयोग की टीम के समक्ष कहा कि घटना के वक्त वह गेस्ट हाउस में था। जबकि विलाल बेग ने कहा कि वह चुंगी गेट पर था। वहां से पुलिस इन लोगों की घसीट कर उपद्रव स्थल तक लाई। दोनों ने कहा कि अगर उस समय के चुंगी गेट और गेस्ट हाउस के वीडियो फुटेज देखे जाएं दो उनकी बात की पुष्टि हो सकती है।

-हाईकोर्ट के निर्देश पर हमारी जांच टीम यहां पांच दिन से जांच में जुटी थी। अब तक हमारी जांच का 80 फीसदी काम पूरा हो गया है। बस अब सीसीटीवी फुटेजों का विश्लेषण और घायल छात्रों के बयान व फॉरेंसिक रिपोर्ट मिलना शेष रह गया है। इसके लिए उन्हें मौका है कि वह आकर दे सकते हैं। वैसे हमारी टीम 24 जनवरी के बाद एक बार फिर यहां आएगी। और जो भी जरूरत होगी, उसे दूसरे दौरे में पूरा कर लिया जाएगा।
-मंजिल सैनी एसएसपी एनएचआरसी
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