न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
लंबे इंतजार के बाद आखिरकार बुधवार को इंद्रदेव की कृपा बरसी तो गर्मी से अकुलाते तालानगरी वासी निहाल हो गए। हालांकि जरा सी बारिश ने जगह-जगह फिसलन एवं जलभराव की स्थिति बना दी तो नगर निगम द्वारा नालों से निकाली गई कीचड़ दोबारा से नालों में जा समायी।
सबसे ज्यादा परेशान मक्का के किसान नजर आए। मंडी में चबूतरों पर सुखाने के लिए डाली गई करीब 50 क्विंटल मक्का बारिश से खराब होने के कगार पर पहुंच गई। इसका दाना काला होने की आशंका से किसान एवं आढ़तियों के चेहरों पर बल नजर आए।
बुधवार को यूं तो आसमान में काले बादल सुबह से ही सूर्य देव से अठखेलियां करते नजर आ रहे थे, लेकिन दोपहर एक बजे के करीब अचानक शुरू हुई बारिश से मौसम सुहाना हो गया। इससे गर्मी से अकुलाते लोगों ने राहत की सांस ली तो उमस भी कम हो गई।
करीब 20 मिनट तक चली बारिश से धरती की तपिश अवश्य कम हुई, लेकिन शहर के विभिन्न मार्गों पर फिसलन एवं जलभराव ने लोगों का राह चलना मुश्किल कर दिया। नालों से निकालकर बाहर डाली गई कीचड़ दोबारा से नालों में जा समाई। इससे ज्यादा बारिश होने की स्थिति में इस कटोरानुमा शहर में जलभराव की स्थिति विकट होने की संभावना बढ़ा दी। सबसे बुरी स्थिति मक्का किसानों की रही।
बेचने के लिए धनीपुर मंडी मक्का लेकर आए किसानों की नीलामी चबूतरों पर पड़ी करीब 50 क्विंटल मक्का बुरी तरह भीग गई। इससे मक्का के दाने काले पड़ने की संभावना है। अनाज मंडी अध्यक्ष सुरेश चंद लोधी ने बताया कि यदि मक्का नहीं सूखी तो वह काली पड़कर खराब हो जाएगी। गुरुवार की बारिश से करीब पांच-सात लाख की मक्का के खराब होने की संभावना है।