अलीगढ़ में 60 फीसदी बच्चों को नहीं मिलता पोषित खाना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
दो वर्ष की उम्र तक बच्चा शारीरिक और मानसिक विकास बहुत तेजी से करता है। इसी दौरान ज्यादा पोषण की जरूरत है। मगर अलीगढ़ में इस उम्र के 60 फीसदी बच्चों को अच्छा खाना भी नहीं मिलता है। जिले में तेजी से बढ़ रहे कुपोषण की यह मुख्य वजह है। यदि इस पर काबू नहीं पाया तो पीड़ित बच्चा किसी भी बीमारी से घिर सकता है और बच्चे की मृत्यु भी संभव है। सिर्फ अच्छे खान-पान से ही बाल मृत्यु में 20 फीसदी तक कमी लायी जा सकती है।
यह तथ्य अलीगढ़ के बच्चों पर हुआ हालिया अध्ययन उजागर कर रहा है। यह रिसर्च 2017 में नामचीन अंतरराष्ट्रीय जर्नल ऑफ फेमिली मेडिसिन एंड प्राइमरी केयर में भी प्रकाशित हो चुका है। गंभीर बीमारियों से कुपोषित बच्चों के इलाज का एक्सपर्ट सेंटर डीईआईसी के मेडिकल अफसर डॉ. इश्तियाक ने यह अध्ययन किया है। ग्रामीण क्षेत्र में जवां ब्लॉक और शहर में नगला किला, शाहनशाहबाद, फिरदौसनगर आदि क्षेत्रों में 6 माह से 23 माह के 326 बच्चों पर यह अध्ययन किया गया। पेश है अध्ययन की विस्तृत रिपोर्ट...
63 फीसदी बच्चे नहीं ले पाते 7 फूड
मिनिमम डायट्री डायवर्सिटी (न्यूनतम आहार विविधता)। 6 माह की उम्र के बाद के बच्चों के लिए डब्ल्यूएचओ और यूनिसेफ ने दिन भर में 7 प्रकार के आहार की रिकमंडेशन की है। उनमें से 4 प्रकार का भी आहार बच्चे को स्वस्थ रखने में सक्षम है, लेकिन अध्ययन में पता लगा कि ग्रामीण क्षेत्र के 63 फीसदी बच्चे इसे फॉलो नहीं करते और शहर में ऐसे 52 फीसदी बच्चे हैं। जिनमें 60 फीसदी बेटियां हैं। बर्थ ऑर्डर के हिसाब से देखें तो इनमें 42.2 फीसदी पहली संतान, 52 फीसदी दूसरी संतान और 68 फीसदी वो बच्चे तीसरी या उसके बाद की संतान शामिल हैं। डायट्री फॉलो न करने वालों में 61.2 फीसदी होम डिलीवरी और 56 फीसदी संस्थागत प्रसव वाले बच्चे हैं। जिनमें 61.1 फीसदी की नॉर्मल डिलीवरी और 68.3 फीसदी बच्चों की सीजेरियन डिलीवरी हुई थी। दूसरी ओर डायट्री को न मानने वाली मां में अधिकतर 31 से 40 उम्र वर्ग की महिलाएं हैं। हालांकि इनमें 66 फीसदी महिलाएं अशिक्षित और 61.5 हिंदू और 54.9 मुस्लिम परिवार हैं।
ये हैं जरूरी 7 फूड
1. अनाज, जड़ और कंद, 2. फलियां और नट्स, 3. डेयरी प्रोडक्ट्स, 4. मांसाहार, 5. अंडा, 6. विटामिन ए से भरपूर फल व सब्जी, 7. अन्य फल और सब्जियां।
ये है आहार की सही मात्रा
आहार की सही मात्रा उम्र और वजन के हिसाब से है। 0 से 6 माह के बच्चों को तो अनिवार्य रूप से मां का दूध ही पिलाना है। 6 से 8 माह पर दलिया व अन्य भोजन जो पूरी तरह मसला हुआ पतला करके दिन में 3-4 बार दें। एक बार में 2-3 चम्मच। 9 से 11 माह पर बारीक कटा हुआ व पूरी तरह मसला हुआ पतला भोजन दिन में 3-4 बार। कुछ ऐसा भी दे सकते हैं जिसे बच्चे पकड़कर खा लें। भोजन एक बार में सवा सौ ग्राम दें। 12 माह से 23 माह पर परिवार में खाया जाने वाला सामान्य भोजन दिन में 3-4 बार देना चाहिए। जरूरी हो तो भोजन को बारीक मसल सकते हैं। एक बार में 200 ग्राम भोजन दें।
छह माह तक तो मां का दूध ही काफी है, लेकिन उसके बाद एमडीडी और एमएमएफ के हिसाब से सही कॉम्प्लीमेंट्री फीडिंग जरूरी है। साथ में ब्रेस्ट फीडिंग भी 2 साल तक देनी चाहिए। वरना बहुत तेज इंफेक्शन होगा और ग्रोथ पर भी दुष्प्रभाव पडे़गा। यदि जन्म से कोई बीमारी है तो भी बच्चा कुपोषित हो जाएगा। कुपोषण बच्चे की प्रतिरोधक क्षमता को लगातार कम करता है। बच्चा फिर बीमारियों से लड़ने लायक नहीं रह जाता। डायरिया, खून की कमी, बार-बार निमोनिया, रतौंधी या नजर कमजोर, हड्डियों में टेढ़ापन, टीबी सहित कोई भी बीमारी बच्चे को घेर सकती है। इसके उलट जन्म से कोई बीमारी है तब भी बच्चा कुपोषित रह सकता है। दोनों ही स्थिति में एक्सपर्ट की तुरंत मदद लेनी चाहिए, वरना बच्चे की जान भी जा सकती है।
- डॉ. इश्तियाक, मेडिकल अफसर, डीईआईसी अलीगढ़।